गाड़ी छोड़िए, यहां तो पैदल चलना भी मुश्किल, गिरने के डर से दूसरे रास्ते से छात्र-छात्राएं एक किलोमीटर की दूरी तय कर जाते हैं स्कूल

गया : शहर के डेल्हा रोड स्थित खरखुरा कॉलोनी से लेकर आरपीएफ बैरक तक सड़क जर्जर होने के कारण लोगों को चलना मुश्किल हो गया है. पिछले दिनों हुई बारिश से तो और बदतर स्थिति हो गयी है. जहां-तहां सड़क पर उभरे गड्ढों की चपेट में आकर अक्सर साइकिल व बाइक सवार गिर कर चोटिल […]

गया : शहर के डेल्हा रोड स्थित खरखुरा कॉलोनी से लेकर आरपीएफ बैरक तक सड़क जर्जर होने के कारण लोगों को चलना मुश्किल हो गया है. पिछले दिनों हुई बारिश से तो और बदतर स्थिति हो गयी है. जहां-तहां सड़क पर उभरे गड्ढों की चपेट में आकर अक्सर साइकिल व बाइक सवार गिर कर चोटिल हो रहे हैं. स्कूली बच्चे तो दूसरे रास्ते से आते-जाते हैं, जिस कारण उन्हें एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है.
इस संबंध में कॉलोनियों के लोगों ने बताया कि इस सड़क पर वाहन चलना दूर की बात है, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. सड़क पर अनगिनत बड़े–बड़े गढ़े उभर गये हैं. हालांकि, बीच-बीच में इस सड़क को पैबंद लगा कर ठीक करने की कोशिश की जाती रही है. लेकिन, स्थिति खराब होती चली गयी. आज स्थिति ऐसी हो गयी है कि इस सड़क पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है.
सड़क बनाने के लिए हुआ था आंदोलन जर्जर सड़क पर चलने से लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. समस्या को देखते हुए कॉलोनी के लोगों ने एकजुट होकर प्रदर्शन भी किया और रेलवे के सहायक मंडल अभियंता के आवास की घेराबंदी भी की थी. उस समय लोगों को आश्वासन दिया गया था कि फंड नहीं है. पैसा आते ही सड़क को बनाया जायेगा. इसके बाद आजतक सड़क को ठीक नहीं किया गया.
छह साल पहले बनी सड़क
वर्ष 2012 के फरवरी में आरआरआई, खुरखुरा से लेकर आरपीएफ बैरक तक सड़क बनायी गयी थी. साढ़े चार लाख की लागत से एक किलोमीटर तक सड़क का निर्माण हुआ था. बाकी सड़क पहले से बनी थी. अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण फिर से सड़क जर्जर हो गयी है.
प्रोजेक्ट के अनुसार काम नहीं कराने पर उठा था सवाल
एक माह पहले सड़क बनाने पर रेलवे कर्मचारियों ने सवाल उठाया था. इसके बाद इस्ट सेंट्रल रेलवे यूनियन कर्मचारी के अधिकारी व रेलवे अधिकारियों की बैठक हुई थी. बैठक में एक से बढ़ एक प्रोजेक्ट तैयार किये गये थे. इस संबंध में इस्ट सेंट्रल रेलवे यूनियन कर्मचारी के सचिव मिथिलेश कुमार ने बताया कि बैठक में 12 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया.
यह पारित भी की गयी थी. लेकिन, प्रोजेक्ट के अनुसार काम शुरू नहीं किया गया. इस कारण आज तक रेलवे कॉलोनियों में विकास का काम नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इस साल कॉलोनियों में सड़क का काम शुरू नहीं किया गया, तो रेलवे अधिकारियों के समक्ष आंदोलन किया जायेगा.

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