Bodhgaya News: (बोधगया से संजीव कुमार सिन्हा) पावन नगरी बोधगया में धर्म, आध्यात्म और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला. धर्म संस्कृति संगम के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक चीवरदान एवं संघदान कार्यक्रम का शनिवार को भव्य समापन हुआ. 6 मई से शुरू हुआ यह आयोजन 9 मई को महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया परिसर में श्रद्धा और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ.
देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु
कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं, उपासकों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया. पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, करुणा, भाईचारे और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली. आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने चीवरदान एवं संघदान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया.
शांति, सद्भाव, करुणा और भाईचारे का वातावरण
मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि समाज में शांति, सद्भाव, करुणा और भाईचारे का वातावरण मजबूत होना चाहिए. उन्होंने बोधगया और गया क्षेत्र को छुआछूत, जातिवाद, हिंसा और प्रदूषण से मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प दोहराया. उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य मानवता, करुणा और सामाजिक एकता को सशक्त करना है.शांति, सद्भाव, करुणा और भाईचारे का वातावरण
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार हुए शामिल
वहीं, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि धर्म संस्कृति संगम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक चेतना का जीवंत प्रतीक है. उन्होंने कहा कि बोधगया की पवित्र धरती सदियों से विश्व को ज्ञान, करुणा और मानवता का संदेश देती रही है.
पश्चिम बंगाल में नए युग की शुरुआत
मीडिया से बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राज्य में नए युग की शुरुआत हो रही है और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विकास और सुशासन की नई दिशा में आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” विजन को और मजबूती मिलेगी.
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा लाभ
तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि युवा नेतृत्व में कार्य करने की क्षमता और सेवा भावना है, जिसका लाभ भविष्य में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा. साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों की ताकत को दर्शाते हैं. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्माचार्य और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे. आयोजन का समापन शांति, सद्भाव और मानव कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ हुआ.
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