गया : शहर को बेहतर बनाने के लिए लाख कोशिश कर ली जाये, यहां के लोग जब तक अपनी आदतों में बदलाव नहीं लायेंगे, तब तक कुछ भी बदलाव की संभावनाएं नहीं दिखती है. शहर की सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की योजना तैयार की गयी है. यहां पर कचरा कलेक्शन के साथ ही स्थानीय स्तर पर निष्पादन भी किया जाना है.
इसके तहत शहर में सभी होल्डिंग में दो-दो डस्टबीन सूखा व गिला कचरा रखने के लिए दिये गये हैं. निगम के अधिकारी का कहना है कि लोगों का सहयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल रहा है. कचरा जमा करने में लोग कोताही बरत रहे हैं. कचरा जमा करने के लिए निगम की ओर से दिये गये डस्टबीन का यूज दूसरे कामों में ले रहे हैं.
सफाई के काम में दैनिक वेतन पर करीब 1500 सफाई कर्मचारी नियुक्त किये गये हैं. जानकारों का कहना है कि कर्मचारियों व संसाधनों की तुलना में बिहार का कोई नगर निगम यहां का कोई निगम मुकाबला नहीं कर सकता है. इसके बाद भी यहां सफाई के लिए हर तरफ किचकिच ही होती रहती है. पिछले दिनों नगर निगम में फैसला लिया गया कि शहर को चार जोन में बांट कर अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किये जायेंगे लेकिन, अब तक इस मामले में सतही तौर पर भी कोई तैयारी नहीं की गयी है. पिछली स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में दोनों सिटी मैनेजर को सफाई की जिम्मेदारी देने की बात उठी थी. इस पर कर्मचारियों में विवाद की स्थिति देख कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. अधिकारी व जनप्रतिनिधि को शक होने लगा था कि सफाई की जिम्मेदारी चेंज होते ही निगम में हड़ताल व कई तरह के विवाद खड़े हो जायेंगे, जबकि कुछ दिन पहले ही प्रमंडलीय आयुक्त व डीएम ने सफाई की जिम्मेदारी सिटी मैनेजर को देने की बात कही थी.
लोगों से नहीं मिल रहा अपेक्षित सहयोग
निगम अपनी ओर से हर संभव कोशिश कर रहा है. शहर के कुछ जगहों पर लोगों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण योजनाएं शत-प्रतिशत लागू नहीं हो पा रही हैं. कूड़ा सड़कों पर फेंकने में लोग पीछे नहीं हैं. यह शहर यहां के लोगों का है. लिहाजा हर एक को सफाई के प्रति जिम्मेदार होना होगा. लोगों के सहयोग के बिना शहर में साफ सफाई की स्थिति में सुधार नहीं लायी जा सकती है.
