पटना में गंगा ने तोड़ा 16 साल का रिकॉर्ड

VIDEO: पटना में गंगा ने तोड़ा 16 साल का रिकॉर्ड, घाटों से आगे पहुंचा पानी; बढ़ा सवाल- क्या डूब सकता है पटना?

पटना में गंगा नदी का जलस्तर पिछले 16 सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है. नदी का पानी अब घाटों को पार कर इलाकों में फैलने लगा है. ऐसे में शहर की बाढ़ से निपटने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं.

Bihar Flood News : पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब पानी नदी के दायरे से निकलकर घाटों से आगे तक पहुंच गया है. एनआईटी घाट के आसपास कई जगहों पर पानी घुटने तक पहुंच चुका है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गंगा का जलस्तर और बढ़ा और नदी ने रौद्र रूप अपनाया, तो पटना इससे निपटने के लिए कितना तैयार है?

16 साल का रिकॉर्ड टूटा, घाटों से आगे बढ़ा पानी

केंद्रीय जल आयोग और बिहार के जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 7 सितंबर की सुबह पटना के दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी. वहीं गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.40 मीटर दर्ज किया गया. यहां उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 50.52 मीटर है. यानी गांधी घाट पर जलस्तर HFL से महज करीब 12 सेंटीमीटर नीचे है. 6 सितंबर को भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही. इस बीच गंगा के जलस्तर ने करीब 16 साल पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है.

बैरिकेडिंग के बावजूद पानी में पहुंच रहे बच्चे

प्रशासन की ओर से संवेदनशील घाटों पर बैरिकेडिंग कर लोगों के जाने पर रोक लगाने का दावा किया जा रहा है. इसके बावजूद बच्चे और अन्य लोग पानी के बीच पहुंच रहे हैं. एनआईटी घाट के आसपास रिपोर्टिंग के दौरान कुछ बच्चे पानी में नहाते हुए नजर आए. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी के साथ हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.

घाट से 150-200 मीटर आगे तक पहुंचा पानी

एनआईटी घाट के पास घाट से करीब 150 से 200 मीटर आगे तक पानी पहुंच चुका है. आगे बढ़ने पर पानी का बहाव और गहराई दोनों बढ़ती दिखाई दे रही है. स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर के आसपास पानी सीने से ऊपर तक पहुंच चुका है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंगा का बढ़ता जलस्तर किस तरह घाटों के आसपास के इलाकों को प्रभावित कर रहा है.

जलस्तर बढ़ा तो ड्रेनेज सिस्टम की भी होगी परीक्षा

पटना में गंगा का जलस्तर और बढ़ने पर शहर के ड्रेनेज सिस्टम और पंपिंग व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है. अगर जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है या पंपिंग सिस्टम काम नहीं करता है, तो निचले इलाकों में पानी की समस्या गंभीर हो सकती है. ऐसे में प्रशासन के सामने सिर्फ नदी के बढ़ते जलस्तर की निगरानी ही नहीं, बल्कि शहर के भीतर जलनिकासी व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने की चुनौती है.

प्रशासन के दावों के बीच सुरक्षा पर सवाल

एक तरफ प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रतिबंधित और संवेदनशील घाटों के आसपास लोग पानी में जाते दिख रहे हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ जलस्तर बढ़ने का नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन का भी है.

बिहार में लगातार बढ़ रहा बाढ़ का खतरा

पूरे बिहार में कई जगहों पर नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें सामने आ रही हैं. पटना में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बना हुआ है. आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ता है या स्थिर होता है, इस पर प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है.

Also Read : हाजीपुर में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM सम्राट, मृतकों के परिजनों को सौंपे ₹44 लाख; बोले- अगले दो दिन बेहद अहम

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 वर्षों से सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है.

इसके साथ ही वे NGO से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, धार्मिक और जनकल्याण से जुड़े अभियानों में उनकी विशेष भागीदारी रही है. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में वे निरंतर योगदान देते रहे हैं.

वर्तमान में विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

विवेक सिंह किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. वे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही समाचार प्रकाशित करते हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग और लेखन में सटीकता तथा विश्वसनीयता बनी रहती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाले विवेक सिंह पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >