बिहार में प्रतिवर्ष डिग्री लेते हैं 2500 डाॅक्टर, फिर भी सरकारी अस्पतालों में आधे से अधिक पद रिक्त

बिहार के मेडिकल काॅलेजों से पढ़ कर प्रतिवर्ष 2500 डाॅक्टर निकलते हैं. सरकारी और प्राइवेट मेडिकल काॅलजों से प्रत्येक साल 22 सौ युवा एमबीबीएस की डिग्री हासिल करते हैं. करीब 1500 डाॅक्टर सीनियर रेजिडेंट के पद पर इंटर्नशिप करते हैं. इसके बावजूद राज्य में डाॅक्टरों की कमी बरकरार है.

पटना. बिहार के मेडिकल काॅलेजों से पढ़ कर प्रतिवर्ष 2500 डाॅक्टर निकलते हैं. सरकारी और प्राइवेट मेडिकल काॅलजों से प्रत्येक साल 22 सौ युवा एमबीबीएस की डिग्री हासिल करते हैं. छह सौ पीजी की डिग्री लेकर प्रतिवर्ष बाहर निकलते हैं. करीब 1500 डाॅक्टर सीनियर रेजिडेंट के पद पर इंटर्नशिप करते हैं. इसके बावजूद राज्य में डाॅक्टरों की कमी बरकरार है. यह स्थिति तब है जब राज्य की करीब 12 करोड़ आबादी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है. नये डाॅक्टरों की शिकायत है कि प्रतिवर्ष नियमित रूप से डाॅक्टरों की बहाली नहीं हो रही है.

अब भी 50 प्रतिशत स्थायी चिकित्सकों के पद रिक्त

दूसरी ओर, आइएमए का मानना नियुक्ति की है कि जटिल प्रक्रिया से आजिज होकर युवा डाॅक्टर प्राइवेट सेक्टर की ओर चले जा रहे हैं. राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्थायी चिकित्सकों के कुल 12895 पद स्वीकृत हैं. स्थायी चिकित्सकों के कुल पदों में 6330 पदों पर ही चिकित्सक कार्यरत हैं. अब भी 50 प्रतिशत स्थायी चिकित्सकों के पद रिक्त हैं. इसी प्रकार से सरकारी अस्पतालों में संविदा वाले 4751 पद स्वीकृत हैं, जिस पर 3030 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं. संविदा वाले 36 प्रतिशत पद रिक्त हैं.

हर साल 2200 एमबीबीएस और 600 विशेषज्ञ डॉक्टर लेते हैं डिग्री

राज्य के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से हर साल करीब 2800 सामान्य और विशेषज्ञ चिकित्सक पास कर रहे हैं. इसके अलावा राज्य में हर साल मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 1500 चिकित्सक सीनियर रेसिडेंसी का प्रशिक्षण लेते हैं. सरकार का कहना है कि राज्य में चिकित्सकों की कमी है. ऐसे में पूरी संख्या में चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. इधर, भासा के कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक ओपीडी व इमरजेंसी चलाने के लिए चिकित्सकों की कमी है.

चिकित्सकों के स्वीकृत व रिक्त पद

  • स्वीकृत पद स्थायी 12895

  • कार्यरत 6330 (रिक्त पद 50.9%)

  • स्वीकृत पद संविदा 4751

  • कार्यरत 3030 (रिक्त – 36.2%)

प्रशिक्षण लेनेवाले चिकित्सक

  • एमबीबीएस 2200 प्रति वर्ष

  • पोस्ट ग्रेजुएट 600 प्रति वर्ष

  • सीनियर रेजीडेंट 1500 प्रतिवर्ष

जटिल नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर चले जाते हैं युवा डाॅक्टर

आइएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाॅ सच्चिदानंद कुमार का मानना है कि इच्छाशक्ति हो, तो चिकित्सकों की कमी दूर हो सकती है. सरकार को इसके लिए बहाली की दुरूह प्रक्रिया को समाप्त करनी होगी. यहां वर्षों बाद नियुक्ति का विज्ञापन जारी होता है.

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