Mirzapur The Movie: मिर्जापुर सीजन-2 के बाद लंबे अंतराल के कारण मुन्ना भैया के किरदार में दोबारा लौटने को लेकर मन में डर था. चिंता थी कि क्या वह फिर उसी अंदाज में मुन्ना को निभा पाएंगे, जिसे दर्शकों ने पसंद किया था. यह बातें मिर्जापुर: द मूवी’ के प्रमोशन के लिए फिल्म के प्रमोशन में पहुंचे मुन्ना त्रिपाठी उर्फ दिव्येंदु शर्मा ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कहा.
उन्होंने कहा कि उन्होंने किरदार को दोबारा समझने के लिए उसके पुराने बेसिक्स पर काम किया. मेकअप और कॉस्ट्यूम में खुद को आईने में देखने के बाद उन्हें लगा कि वही मुन्ना वापस आ गया है. सेट पर पुराने कलाकारों और उसी माहौल ने भी उनकी काफी मदद की. हालांकि, एक अभिनेता को पानी की तरह होना चाहिए, जिसे जिस किरदार में रखा जाए, वह उसी रूप में ढल जाए.
Q. मुन्ना त्रिपाठी के किरदार ने आपको जो पहचान दी, उससे आपने क्या सीखा?
दिव्येंदु: मुझे सबसे पहली पहचान प्यार का पंचनामा के 'लिक्विड' किरदार ने दी थी, जिसे मुन्ना के रोल ने काफी बढ़ाया. मैंने सीखा कि अगर आपको एक आर्टिस्ट के तौर पर अपने काम पर भरोसा है, तो सही मौके का इंतजार करना चाहिए. मिर्जापुर से पहले मैं कमर्शियल और बॉय नेक्स्ट डोर टाइप रोल्स करता था. मुन्ना के किरदार ने मुझे दर्शकों और इंडस्ट्री को अपना डार्क और ग्रे शेड दिखाने का मौका दिया.
Q. लंबे अंतराल के बाद दोबारा मुन्ना भैया के तेवर और मिजाज में लौटना कितना मुश्किल था?
दिव्येंदु: सच कहूं तो थोड़ा डर और असमंजस था कि क्या मैं दोबारा वही मुन्ना बन पाऊंगा जिसे लोगों ने प्यार दिया था. लेकिन जब मैंने बेसिक्स से शुरुआत की, स्क्रिप्ट पढ़ी और वैनिटी वैन में कॉस्ट्यूम पहनकर शीशे में खुद को देखा, तो लगा कि हां.., यह वही शख्स है. सेट पर गुड्डू, बबलू और बाऊजी जैसे पुराने सह-कलाकारों से मिलते ही चीज़ें अपने आप याद आती चली गईं.
Q. परदे के मुन्ना भैया असल जिंदगी के दिव्येंदु से कितने अलग हैं?
दिव्येंदु: दिव्येंदु असल ज़िंदगी में एकदम न्यूट्रल है. थिएटर के समय से हमें सिखाया गया है कि एक एक्टर को पानी की तरह फॉर्मलेस होना चाहिए ताकि वह किसी भी ढांचे में ढल सके. मुझमें मुन्ना जैसा अग्रेशन नहीं है, हां थोड़ा गुस्सा आ जाता है लेकिन तुरंत कंट्रोल भी हो जाता है. लाइफ में ह्यूमर जरूर बना रहता है.
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Q. मुन्ना भैया के आइकॉनिक डायलॉग्स के बाद, क्या फिल्म में दर्शकों को कुछ नए और तीखे वन-लाइनर्स सुनने को मिलेंगे?
दिव्येंदु: बिल्कुल. जब मुन्ना भैया बड़े पर्दे पर आ रहे हैं, तो धमाका भी बड़ा ही होगा. जहां तक वन-लाइनर्स की बात है. उन्हें बोलना मेरा काम है, लेकिन वो करारे डॉयलॉग्स गढ़ने का पूरा 75% क्रेडिट हमारे राइटर पुनीत कृष्णा को जाता है. मेरा काम तो बस 25% की अदायगी का है. पुनीत का कलम ही ऐसा चलता है कि डायलॉग्स अपने आप आइकॉनिक बन जाते हैं. इस बार भी आपको वही पुराना मजा और नए तेवर देखने को मिलेंगे.
Q. बिहार आने का अनुभव कैसा रहा और यहां के लोगों के बारे में क्या राय है?
दिव्येंदु: पहली बार पटना आकर बहुत अच्छा लगा. बिहार अपने आप में एक कम्प्लीट स्टेट है, जहां मानसिक और शारीरिक क्षमता का अद्भुत बैलेंस है. यहां के लोग दिमाग के बहुत तेज, राजनीति के जानकार और बेहतरीन ह्यूमर वाले होते हैं. देश की IAS लॉबी से लेकर जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले लोगों तक, बिहारी समाज की मेहनत हर जगह दिखती है. अगर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर का बुलावा आया, तो बिहार में शूटिंग करना और बिहारी किरदार निभाना बेहद शानदार रहेगा.
