गर्मी और भीड़ के कारण एक घंटे पहले खत्म हुई धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा, दिव्य दरबार को लेकर की बड़ी घोषणा

भीषण गर्मी और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को देखते हुए रविवार को बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बाबा ने एक घंटा पूर्व ही हनुमंत कथा का समापन कर दिया. उन्होंने भक्तों से अपील की है कि बाहर से लोग अब यहां ना आयें. स्थानीय ( नौबतपुर के आसपास ) लोगों को भी उन्होंने कम आने की अपील की है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 14, 2023 8:13 PM

पटना. भीषण गर्मी और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को देखते हुए रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक घंटा पूर्व ही हनुमंत कथा का समापन कर दिया. उन्होंने भक्तों से अपील की है कि बाहर से लोग अब यहां ना आयें. स्थानीय ( नौबतपुर के आसपास ) लोगों को भी उन्होंने कल से कम संख्या में आने की अपील की. 15 मई को लगने वाले दिव्य दरबार को भी उन्होंने स्थगित रखने की इच्छा प्रकट की. वैसे इस मसले पर कल सुबह अंतिम निर्णय लेने की बात कही है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि कथा जारी रहेगा, लेकिन आप लोग घरों से ही कथा का आनंद लें. वो कथा किसी काम की नहीं है, जिससे कोई हानि हो जाये.

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कथा सुनने दस लाख की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज तक मेरे कथा में इतनी भीड़ नहीं जुटी थी. आयोजकों ने बताया है कि इस भीषण गर्मी में करीब दस लाख की संख्या में श्रद्धालु हनुमंत कथा को सुनने नौबतपुर के तरेत मठ पहुंचे हैं. श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ है, ऊपर से भीषण गर्मी है. भीड़ के कारण धूल उड़ने से लोगों को घूटन महसूस होगी. श्रद्धालुओं की किसी तरह की दिक्कत ना हो, इसलिए दरबार को विराम रखना होगा. पांचों दिन कथा चलती रहेगी, लेकिन दिव्य दरबार ऐसी परिस्थिति में उचित नहीं लग रहा है.

धूप में नहीं आने की अपील

बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने पटना के बाहर से आनेवाले श्रद्धालुओं से कहा कि सोशल मीडिया पर टीवी पर हनुमंत कथा देख और सुन लीजिएगा, लेकिन नौबतपुर नहीं आइयेगा. श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़ और उमस को देखते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने आज कथा की कथा निर्धारित समय से पहले ही खत्म कर दी. उन्होंने कहा कि कल से आप लोग कथा सुनने नहीं आइयेगा. मुझे इतनी भीड़ और इतनी गर्मी में किसी अनहोनी की चिंता सता रही है. आप लोग इतनी संख्या में हनुमंत कथा को सुनने पहुंचे, हम आपका उपकार कभी नहीं भूलेंगे.

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