पटना में डिजिटल सेन्सेस की तैयारी, 4461 जनगणनाकर्मी तैनात, जियो-फेंसिंग से होगी निगरानी

Digital Census 2026: पटना में सेन्सेस को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पटना नगर निगम क्षेत्र के सभी अंचलों में कुल 4461 कर्मियों की तैनाती की जा रही है. डिजिटल तकनीक और जियो-फेंसिंग की मदद से इस बार सेन्सेस प्रक्रिया को तेज, विश्वसनीय और अधिक सटीक बनाने की योजना है, ताकि विकास योजनाओं के लिए ठोस डेटा उपलब्ध हो सके.

Digital Census 2026: बिहार की राजधानी पटना में सेन्सेस के कार्यों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. पटना नगर निगम ने अपने सभी अंचलों में कुल 4461 कर्मियों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए तैनात करने का निर्णय लिया है.

निगम प्रशासन ने अंचलवार सेन्सेस के काम में लगे लोगों और सुपरवाइजर की विस्तृत सूची तैयार कर ली है.इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए इस बार तकनीक का जबरदस्त तड़का लगाया गया है, जिससे डेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं रहेगी.

सबसे अधिक कर्मी पाटलिपुत्र अंचल में

पटना के विभिन्न अंचलों में काम का बोझ अलग-अलग होगा. सबसे ज्यादा सेन्सेस के काम में लगे लोगों और सुपरवाइजर पाटलिपुत्र अंचल में तैनात किए गए हैं, जिनकी संख्या 1079 है। वहीं, पटना सिटी अंचल में सबसे कम 445 कर्मियों को लगाया जाएगा.

अन्य अंचलों की बात करें तो नूतन राजधानी में 806, कंकड़बाग में 725, बांकीपुर में 652 और अजीमाबाद में 753 कर्मियों की तैनाती होगी. इन सभी प्रगणकों के ऊपर चार्ज अफसर के रूप में संबंधित अंचलों के कार्यपालक पदाधिकारी कमान संभालेंगे.

फील्ड ट्रेनरों की विशेष भूमिका

सेन्सेस के इस विशाल कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए 58 फील्ड ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं. जिला प्रशासन के निर्देशानुसार, स्कूलों के वरिष्ठ शिक्षकों को ही फील्ड ट्रेनर की जिम्मेदारी दी गई है. ये ट्रेनर सेन्सेस के काम में लगे लोगों और सुपरवाइजर को टैबलेट के उपयोग, डेटा एंट्री के तरीके और फील्ड में आने वाली चुनौतियों का प्रशिक्षण देंगे.

जिला स्तर पर भी इसके लिए जल्द ही विशेष वर्कशॉप आयोजित की जाएगी, ताकि पटना नगर निगम क्षेत्र में जनगणना का कार्य बिना किसी त्रुटि के समय पर पूरा किया जा सके.

लोकेशन से होगी निगरानी

इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक आधारित होगी. हर कर्मी को टैबलेट दिया जाएगा, जिसमें विशेष कोड और लोकेशन लिंक रहेगा. यदि कोई कर्मी तय क्षेत्र से बाहर जाकर डेटा दर्ज करने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देगा. जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर जानकारी सही इलाके से ही दर्ज हो.

प्रशासन का मानना है कि डिजिटल जनगणना से समय की बचत होगी और आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी. इससे शहर की आधारभूत सुविधाओं, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास योजनाओं के लिए विश्वसनीय डेटा उपलब्ध हो सकेगा. यही डेटा भविष्य की नीतियों और बजट निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगा.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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