चिकन नेक से गुवाहाटी तक बदलेगा रेल नेटवर्क, बिहार-बंगाल बॉर्डर के नए रूट को समझिए

Simanchal Chicken Neck Rail Network: दिल्ली से गुवाहाटी तक रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना में बिहार के सीमांचल की भूमिका बढ़ सकती है. रक्सौल, अररिया और ठाकुरगंज से सिलीगुड़ी तक कई रेल परियोजनाएं इस नेटवर्क को नया रास्ता दे रही हैं. इससे कटिहार-बरौनी रूट का दबाव घटने, माल ढुलाई बढ़ने और पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.

Simanchal Chicken Neck Rail Network: केंद्र सरकार दिल्ली और पूर्वोत्तर के बीच आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए एक ऑप्शनल रेल मार्ग तैयार कर रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा जारी नए रूट मैप के अनुसार, यह लाइन गोरखपुर, रक्सौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, सरायगढ़, फारबिसगंज, अररिया और ठाकुरगंज से होते हुए सिलीगुड़ी और आगे गुवाहाटी तक जाएगी.

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी चिकन नेक इलाके के लिए एक मजबूत वैकल्पिक नेटवर्क तैयार करेगा, जिससे आपात स्थिति में भी रेल संपर्क नहीं टूटेगा.

बॉर्डर इलाकों की बदलेगी तस्वीर, व्यापार और सुरक्षा को मिलेगी ताकत

नेपाल और बंगाल सीमा से सटे रक्सौल, अररिया और ठाकुरगंज जैसे इलाके इस नई योजना के केंद्र में हैं. यह नया रास्ता सिर्फ आम यात्रियों के सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि भविष्य में व्यापारिक सामान की ढुलाई और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए भी बेहद असरदार साबित होगा. एक ही रूट पर निर्भरता खत्म होने से पूर्वोत्तर भारत तक पहुँचने के लिए एक से अधिक सक्षम रेल मार्ग उपलब्ध रहेंगे, जिससे पूरे नेटवर्क की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

पुराने व्यस्त रेल रूटों को मिलेगी राहत, समय पर चलेंगी ट्रेनें

वर्तमान में दिल्ली से पूर्वोत्तर जाने वाली अधिकांश मालगाड़ियां और एक्सप्रेस ट्रेनें कटिहार और बरौनी वाले मार्ग से गुजरती हैं, जिससे वहां अक्सर जाम की स्थिति रहती है. रक्सौल-दरभंगा-अररिया-सिलीगुड़ी का नया मल्टी-ट्रैक रूट चालू होने के बाद नई गाड़ियां इस रास्ते से भेजी जा सकेंगी. इससे पुराने व्यस्त ट्रैक से अतिरिक्त बोझ हटेगा, जिससे ट्रेनों की लेट-लतीफी में कमी आएगी और नए ट्रेनों के परिचालन के रास्ते खुलेंगे.

सीमांचल में रेल लाइनों के दोहरीकरण का काम तेज

इस बड़े प्लान को जमीन पर उतारने के लिए सीमांचल के कई रेलखंडों को अपग्रेड किया जा रहा है. अररिया-गलगलिया लाइन के दोहरीकरण की प्रक्रिया जारी है और किशनगंज में जमीन अधिग्रहण की शुरुआती अधिसूचना भी निकल चुकी है. इसके अलावा अलुआबाड़ी रोड से ठाकुरगंज (करीब 20 किमी) और ठाकुरगंज से सिलीगुड़ी (करीब 56 किमी) के बीच पटरियों को डबल करने की मंजूरी मिल चुकी है. इन कामों के पूरा होते ही इस इलाके में ट्रेनों की संख्या और रफ्तार दोनों बढ़ जाएगी.

ठाकुरगंज बन सकता है उत्तर बिहार और बंगाल को जोड़ने वाला नया जंक्शन

कई रेल परियोजनाओं के आपस में जुड़ने से ठाकुरगंज की भूमिका एक सामान्य स्टेशन से बदलकर बड़े जंक्शन के रूप में उभर सकती है. ठाकुरगंज से चतरहाट के बीच लगभग 24 किमी लंबी नई लाइन का सर्वे और मिट्टी जांच का काम चल रहा है. अलुआबाड़ी रोड से न्यू जलपाईगुड़ी के बीच तीसरी और चौथी लाइन का प्लान भी इस क्षेत्र को मजबूत बनाएगा. इन सभी पटरियों के जुड़ने से अररिया, ठाकुरगंज और सिलीगुड़ी के बीच एक नया और सीधा रेल बाईपास बनकर तैयार हो जाएगा.

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इतने बड़े रेल नेटवर्क में पूर्णिया की अनदेखी पर उठे सवाल

एक ओर जहां सीमांचल के कई छोटे इलाकों को इस विशाल रेल योजना से जोड़ा जा रहा है, वहीं पूर्णिया जैसे बड़े शहर का नाम इस मुख्य नक्शे में न होने से स्थानीय लोगों में निराशा है. पूर्णिया की बड़ी आबादी लंबे समय से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों के लिए सीधी ट्रेनों की मांग कर रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ पूर्णिया से भी नई लंबी दूरी और इंटरसिटी ट्रेनों की शुरुआत की जानी चाहिए ताकि क्षेत्र का संपूर्ण विकास हो सके.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 4 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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