बाढ़ ने रोकी जिंदगी की रफ्तार, गांवों का संपर्क टूटा, लोग परेशान

कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में बाढ़ का विकराल रूप सामने आया है. नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कोसी और कमला बलान नदियां उफान पर हैं, जिससे कई गांव टापू बन गए हैं. जनजीवन, शिक्षा और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

Darbhanga Flood News: नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में स्पष्ट दिखाई देने लगा है. लगातार चौथे दिन भी कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई गांव चारों ओर से पानी से घिर गए हैं. बाढ़ का पानी अब खेतों से निकलकर जनजीवन, शिक्षा, रोजगार और आवागमन को प्रभावित कर रहा है.

Kusheshwarsthan News: कई गांव बने टापू, नाव ही एकमात्र सहारा

प्रखंड के इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियां, बलथरवा, बसबरिया तथा सुघराइन पंचायत के भरैन टोला पूरी तरह पानी से घिर गए हैं. गांवों का सड़क संपर्क टूट जाने से लोगों के लिए गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. बाजार, बैंक, अस्पताल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीण निजी नावों पर निर्भर हैं. नाव संचालक प्रति व्यक्ति 40 रुपये किराया वसूल रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है.

स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ा असर

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है. प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मिनियां और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर चारों ओर से पानी से घिर चुके हैं. विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से दोनों स्कूलों में पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है. वहीं मध्य विद्यालय बरनियां के शिक्षक नाव से विद्यालय पहुंच रहे हैं. जलस्तर बढ़ने पर अन्य विद्यालयों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है.

खाने-पीने और दवा की बढ़ी समस्या

बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के सामने भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवा की समस्या गंभीर होती जा रही है. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और सरकारी नाव सेवा शुरू करने की मांग की है.

मुख्यालय से संपर्क टूटा, लोगों में बढ़ी चिंता

बाढ़ का पानी फैलने से प्रभावित गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क लगभग टूट गया है. उसरी, उजुआ, सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायत के निचले इलाकों में भी तेजी से पानी फैल रहा है. इससे वहां के लोगों में भी चिंता बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते राहत व्यवस्था नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

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लेखक के बारे में

संतोष पोद्दार को पत्रकारिता का 20 वर्षों का लंबा अनुभव है. ये सामाजिक, राजनीतिक, आपराधिक व धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखते हैं और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

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