मिथिला विश्वविद्यालय के डिग्री पार्ट थ्री की परीक्षा के प्रश्न पत्रों के पैटर्न में एकरूपता नहीं

लनामिवि की ओर से डिग्री पार्ट थ्री (सत्र 2022-25) की गुरुवार से शुरू आनर्स विषयों की परीक्षा के प्रश्न पत्रों के पैटर्न में एकरूपता नहीं देखी गई.

दरभंगा. लनामिवि की ओर से डिग्री पार्ट थ्री (सत्र 2022-25) की गुरुवार से शुरू आनर्स विषयों की परीक्षा के प्रश्न पत्रों के पैटर्न में एकरूपता नहीं देखी गई. इसको लेकर छात्रों के बीच विवि प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त था. जानकारी के अनुसार संगीत एवं इतिहास विषय के प्रश्न पत्र में दो अंक वाला विकल्प के साथ 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य था. अन्य नौ में से 20-20 अंकों के किसी चार प्रश्नों का उत्तर देने को कहा गया. वहीं हिंदी विषय में बिना विकल्प के दो अंक वाला 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछा गया था. जबकि जंतुविज्ञान में वस्तुनिष्ठ प्रश्न नहीं दिया गया था. 20-20 अंक के नौ प्रश्न दिये गये थे, जिसमें से पांच का उत्तर देना था. जबकि वाणिज्य विषय में पूछे गये कुल 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों (20-20 अंक) में से किसी पांच का उत्तर मांगा गया था.

छात्रों ने कहा, विश्वविद्यालय को उनके भविष्य की चिंता नहीं

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक ही सत्र एवं खंड की परीक्षा में विषयवार प्रश्नों का अलग- अलग पैटर्न देख छात्रों में तरह- तरह की चर्चा चल रही थी. छात्र कह रहे थे कि विवि को छात्रों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है. प्रश्न पत्र तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी विश्वविद्यालय संजीदगी से काम नहीं कर पाता है.

जिस विषय के प्राध्यापक को जैसा सूट करता पैटर्न, वैसा बना डालते प्रश्न

छात्रों का कहना था कि जिस विषय के प्राध्यापकों को, जिस पैटर्न पर मन होता है, उसी पैटर्न पर प्रश्न तैयार कर देता है. विश्वविद्यालय के अधिकारी को भी इसे देखने की फुर्सत नहीं है. प्रश्नपत्र सेट करने वाला जिस तरह से सेट करके भेजता है, उसे बिना देखे-जांचे छपने के लिये भेज देता है. इसका खुलासा तब होता है, जब परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र छात्रों के बीच वितरित होता है. तब तक काफी देर हो चुकी रहती है.

गलती को एक-दूसरे पर टालते रहते अधिकारी

प्रश्न पत्रों के अलग-अलग पैटर्न पर जब कभी सवाल उठता है, तो गलती के लिए खुद के बजाए विश्वविद्यालय के अधिकारी एक- दूसरे को जिम्मेदार बताने लगते हैं. जब इससे भी बात नहीं बन पाती है, तो यह कहकर टाल देते हैं, कि अगली बार से इसे सुधार लिया जायेगा. हालांकि वह गलती अगली बार भी सुधर नहीं पाती है. सवाल उठाने वाले छात्र भी निकल चुके होते हैं, इसलिये चर्चा दुबारा नहीं हो पाती.

पूर्व के प्रश्न पत्र के पैटर्न का आधार बन रहा समस्या का कारण

जानकारी के अनुसार प्रश्न पत्र सेट करने वाले प्राध्यापकों को पिछली परीक्षा का प्रश्नपत्र नमूना के तौर पर भेजा जाता है. प्राध्यापक उसी नमूने के आधार पर नया प्रश्न सेट करते हैं. इससे पूर्व के प्रश्न पत्र के पैटर्न में हुई गलती जारी रहती है.

सभी विषयों के प्रश्नों का पैटर्न एक समान होनी चाहिये. अगली बार से इसमें एकरूपता लाने के लिए विवि द्वारा हर स्तर से आवश्यक कदम उठाया जाएगा. एकेडमिक मामले में किसी स्तर पर होने वाली कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस पर नकेल कसी जाएगी.

प्रो. विनोद कुमार ओझा, परीक्षा नियंत्रक

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Published by: Ranjeet thakur

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