Darbhanga News: देश की आजादी के आंदोलन में रंगमंच ने निभायी महत्वपूर्ण भूमिका

Darbhanga News: लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग में "मैथिली नाटक एवं रंगमंचक विकास यात्रा " विषय पर शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा की अध्यक्षता में व्याख्यान हुआ.

Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग में “मैथिली नाटक एवं रंगमंचक विकास यात्रा ” विषय पर शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा की अध्यक्षता में व्याख्यान हुआ. इसमें मैथिली साहित्य के कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार और बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित ऋषि वशिष्ठ ने कहा कि नाटक को ””””””””पंचम वेद”””””””” कहा गया है. रंगमंच ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. समकालीन परिवेश में नाटक समाज के सबसे निचले तबके से लेकर सरकारी स्तर तक, हर तरह के लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है. नाटक मंचन के दौरान अभिनेता अपनी अभिव्यक्ति की कला विकसित करने में सक्षम होते हैं. उन्होंने अभिनय के आंगिक, वाचिक, सात्विक और आहार्य तत्वों को महत्त्वपूर्ण माना. नाटककार का अस्तित्व नाटक की मंचीयता में निहित है. इसीलिए गांव से शहर तक नाटकों की प्रस्तुति और मंचन होना बेहद जरूरी है.

मैथिली में नाटक की प्राचीन परंपरा

ऋषि ने कहा कि मैथिली साहित्य में आज भी कई नाटककार सक्रिय हैं. इसमें महेंद्र मलंगिया, अरविंद अक्कू, कुणाल, आनंद कुमार झा, कमल मोहन चुन्नू जैसे प्रमुख नाटककार शामिल हैं. कहा कि अब कहानी और उपन्यास के रंगमंच ने जोड़ पकड़ लिया है. इनके नाट्य रूपांतरण का कार्य चल रहा है. मैथिली में नाटक की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो भविष्य में भी जारी रहेगी. यह परम्परा बहुत सशक्त है.

मैथिली के नाटक एवं रंगमंच के अच्छे जानकार हैं वशिष्ठ- प्रो. झा

इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. झा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए ऋषि वशिष्ठ से परिचय कराया. कहा कि ऋषि वशिष्ठ मैथिली के नाटक एवं रंगमंच के अच्छे जानकार हैं. ग्रामीण एवं शहरी रंगमंच को इन्होंने बहुत करीब से देखा और जिया है. ऋषि ने नाटकों के साथ कई सिनेमा के स्क्रिप्ट भी लिखे हैं. व्याख्यान में डॉ सुनीता कुमारी, राजनाथ पंडित, प्रियंका कुमारी, शिवम कुमार झा आदि ने भी बातें रखी. मौके पर डॉ सुरेश पासवान, शोधार्थी शीला कुमारी, नेहा कुमारी, मिथिलेश कुमार चौधरी, मनोज कुमार, पवन कुमार महतो, प्रवीण कुमार आदि मौजूद थे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ अभिलाषा कुमारी ने किया.

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Author: PRABHAT KUMAR

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