Darbhanga : पद्मभूषण शारदा सिन्हा की गीतों की प्रस्तुति से भावविभोर हुए श्रोता

शारदा सिन्हा की लोक गायन शैली " शीर्षक पर व्याख्यान सह कार्यशाला हुई.

दरभंगा. लनामिवि के पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग में पद्मभूषण डॉ शारदा सिन्हा चेयर की ओर से विश्व संगीत दिवस समारोह के तहत राष्ट्रीय संगीत कार्यशाला में शुक्रवार को “शारदा सिन्हा की लोक गायन शैली ” शीर्षक पर व्याख्यान सह कार्यशाला हुई. विभागाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ””””””””काव्या”””””””” ने कहा कि चेयर की ओर से यह प्रथम आयोजन है. यह गर्व का विषय है कि विदुषी शारदा सिन्हा इसी विश्वविद्यालय में समस्तीपुर महिला कालेज में संगीत विभागाध्यक्ष थी. उनकी संगीतज्ञता सर्व विदित है. स्वर्गीय शारदा सिन्हा के गाए गीत ””””””””बाबा बैजनाथ हम आयल भीखरिया”””””””” को प्रथम तकनीकी सत्र के पूर्व छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किये. डॉ शारदा सिन्हा के पुत्र डॉ अंशुमन कुमार ने ””””””””शारदा सिन्हा के व्यक्तित्व और संगीत”””””””” विषय पर पावर प्वाइंट के माध्यम से उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया. उनका बाल्यकाल, शैशव काल, युवा काल, प्रौढ़ावस्था आदि को सचित्र तरीके से रखा. जगदंबा घर में दियरा गीत गाकर संपूर्ण परिवेश को कर दिया शारदामय. द्वितीय सत्र में उनकी पुत्री डॉ वंदना भारद्वाज ने शारदा सिन्हा के गाए लोक गीतों को प्रस्तुत की. ””””””””जगदंबा घर में दियरा”””””””” गाकर संपूर्ण परिवेश को शारदामय कर दिया. इसके बाद क्रमशः डमरुआ हे गोरी ल गेल चोर, अमुआ महुअवा के झूमे डरिया, उधो बारी बयस बीतल जाए रे, सावन के आयल महिनमा तथा अंत में विद्यापति की प्रसिद्ध रचना ””””””””के पतिया ल जायत रे”””””””” गाकर माहौल को भावपूर्ण कर दी. इनके साथ बैंजो पर शिवकुमार, तबला पर सुधांशु कुमार और दीप नारायण ने संगति की. तृतीय सत्र में डॉ वंदना भारद्वाज ने “रामजी से पूछे जनकपुर के नारी ” गाकर प्रतिभागियों को सिखाया और अभ्यास कराया. इसके बाद “शिव हो उतरब पार कवन विधि ” का अभ्यास कराया. आयोजन में डॉ वंदना भारद्वाज की पुत्री अनुषा ने ””””””””काठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ”””””””” गीत प्रस्तुत की. अंत में छात्र-छात्राओं ने “बिसरइह जनी बालम, हमार सुधिया ” गाकर उन्हें विदा किया. ———– श्यामा मंदिर में अंशुमान एवं वंदना को किया गया सम्मानित दरभंगा. मशहूर गायिका शारदा सिन्हा के पुत्र अंशुमान सिन्हा एवं पुत्री वंदना भारद्वाज ने मां श्यामा का दर्शन किया और विधिवत पूजा की. इस अवसर पर मां श्यामा मंदिर न्यास समिति की प्रभारी सह सचिव मधुबाला सिन्हा ने इन्हें मां की चुनरी से सम्मानित किया और स्मारिका भेंट की. अंशुमान और वंदना ने बताया कि जब उनकी मां दरभंगा आती थी, तो मां श्यामा मंदिर आना नहीं भूलती थी. आज वह नहीं हैं, लेकिन मां की याद है. मां की तरह ही वे भी दरभंगा आने पर मां श्यामा के दरबार में आये हैं. मौके पर प्रभारी प्रबंधक रमानाथ झा सहित कई कर्मी मौजूद थे.

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Author: DIGVIJAY SINGH

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