आरएसएस का ध्येय राष्ट्रभक्ति से संस्कारित व्यक्ति निर्माण, दरभंगा में बोले अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने दरभंगा में संघ के एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि संघ का मूल ध्येय राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्ति निर्माण है. संघ का सफर 17 लोगों से शुरू होकर आज 88 हजार शाखाओं तक फैल चुका है.

आरएसएस नगर एकत्रीकरण: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल से ही राष्ट्रीय भावना और उच्च आदर्शों से संस्कारित व्यक्ति निर्माण के महान कार्य में निरंतर जुटा हुआ है. संघ का मूल ध्येय हर नागरिक को संस्कारवान बनाकर राष्ट्र और समाज सेवा के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देना है. यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कही. वे रविवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित संघ की दरभंगा नगर इकाई के भव्य एकत्रीकरण कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

17 लोगों से शुरू हुआ सफर, आज 88 हजार दैनिक शाखाएं

अपने बौद्धिक संबोधन में सुनील अंबेकर ने संघ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, दर्शन और कार्यपद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि संघ का संपूर्ण कार्य बिना किसी व्यक्तिगत लोभ, स्वार्थ या लाभ के केवल राष्ट्रहित के लिए समर्पित स्वयंसेवकों के बलबूते पिछले 100 वर्षों से गतिमान है. उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा:

  • स्थापना का कालखंड: वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन पूज्य डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में संघ की नींव रखी थी.
  • प्रारंभिक स्वरूप: स्थापना के समय संघ से महज 17 लोग जुड़े थे, लेकिन दृढ़ संकल्प के कारण यह अभियान रुका नहीं.
  • वर्तमान विस्तार: आज संघ का कार्य भारत के कोने-कोने के साथ विश्व के कई देशों तक फैल चुका है. वर्तमान समय में पूरे देश में लगभग 88 हजार दैनिक शाखाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं.

सामूहिक प्रयास से देश में आ रहा व्यापक सामाजिक परिवर्तन

सुनील अंबेकर ने कहा कि संघ की शाखा पद्धति देखने में अत्यंत सरल और सामान्य लग सकती है, लेकिन एक विचार, एक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ किए गए निरंतर प्रयासों ने समाज में गहरा प्रभाव छोड़ा है. आज देश के अंदर जो सकारात्मक सामाजिक बदलाव और राष्ट्रीय चेतना दिख रही है, उसमें संघ के कार्यकर्ताओं के मूक तपस्या की अहम भूमिका मानी जा रही है.

शताब्दी वर्ष में हर गांव तक कार्य पहुंचाने का आह्वान

उन्होंने संघ के स्थापना के शताब्दी वर्ष को मील का पत्थर बताते हुए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया:

  • नई ऊर्जा का संचार: स्वयंसेवक शताब्दी वर्ष में अधिक ऊर्जा, निष्ठा और समर्पण के साथ समाज निर्माण में जुटें.
  • गांव-गांव तक दस्तक: संघ के राष्ट्रवादी विचार और सेवा कार्यों को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तथा देश के प्रत्येक गांव तक पहुंचाना आवश्यक है.

शाखा आयोजन के बाद प्रार्थना के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

एकत्रीकरण से पहले विश्वविद्यालय परिसर में विधिवत प्रभात शाखा लगाई गई, जिसमें स्वयंसेवकों ने व्यायाम, योग, समता व अन्य दैनिक गतिविधियों का अभ्यास किया. इसके बाद संघ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

बड़ी संख्या में पदाधिकारी व स्वयंसेवक रहे मौजूद

कार्यक्रम में विभाग संघचालक डॉ अजित कुमार सिंह, नगर संघचालक दिनेश कुमार मिश्र, दिलीप झा, अविनाश कुमार, रुद्र नारायण मंडल, तरुण झा, अवधेश झा, राजेश श्रीवास्तव, रमेश कुमार, राजीव कुमार, मनीष कुमार सत्य, रामप्रवेश ठाकुर, मदन झा, प्रदीप गुप्ता और रंगनाथ ठाकुर सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए.

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By Prabhat khabar news desk

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