नकली मिठाई का बड़ा सिंडिकेट: बाजार में मिल रहा मिल्क पाउडर का नकली रसगुल्ला, लीवर-किडनी को बड़ा खतरा

दरभंगा में दूध के शुद्ध छेने के नाम पर पाउडर से नकली रसगुल्ले बेचे जा रहे हैं. सुपौल बाजार और आसपास के इलाकों में चल रहे इस अवैध कारोबार से लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है. जानिए क्या है पूरा मामला और डॉक्टर की चेतावनी.

Fake Rasgulla factory: दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत सुपौल बाजार और इसके ग्रामीण इलाकों में इन दिनों दूध के शुद्ध छेने से बने रसगुल्ले के नाम पर पाउडर से तैयार कथित नकली मिठाई धड़ल्ले से बेची जा रही है. कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में यह पूरा कारोबार लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ बन चुका है. आरोप है कि बिना किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन और मानक के यह अवैध धंधा पिछले सात वर्षों से सीना तानकर चल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की नजर अब तक इस पर नहीं पड़ी है.

सिसौनी रेलवे गुमटी के पास चल रहा नकली रसगुल्ले का कारखाना

  • स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, सुपौल से पोखराम जाने वाली सड़क पर सिसौनी में रेलवे गुमटी से ठीक पहले इस कथित नकली रसगुल्ले का मुख्य कारखाना संचालित हो रहा है.
  • दुकानों में खपाई जा रही खेप: इस कारखाने में रोजाना बड़ी मात्रा में पाउडर और अन्य रसायनों के घोल से रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं.
  • शुद्ध के नाम पर ठग: तैयार खेप को सुपौल बाजार और आस-पास की मिष्ठान्न दुकानों में सप्लाई किया जाता है, जहां दुकानदार ग्राहकों को इसे शुद्ध दूध का छेना बताकर महंगे दामों पर बेचते हैं.
  • त्योहारों में दोगुनी मांग: ग्रामीणों का कहना है कि शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में इस मिलावटी मिठाई की मांग और ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे सिंडिकेट को भारी मुनाफा होता है.

डॉक्टरों की चेतावनी: लीवर और किडनी को हो सकता है भारी नुकसान

चिकित्सकों के अनुसार, केमिकल युक्त और घटिया दर्जे के पाउडर से बनी मिठाइयां मानव शरीर के लिए बेहद घातक हैं. इसके नियमित सेवन से पेट की गंभीर बीमारियों के साथ-साथ लीवर और किडनी के डैमेज होने का बड़ा खतरा रहता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह धीमी जहर की तरह काम करता है.

क्या कहते हैं अधिकारी और व्यवसायी?

इस गंभीर मामले पर तत्कालीन खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि तकनीक के हिसाब से पाउडर से रसगुल्ले बनाए जा सकते हैं, लेकिन बिना वैध रजिस्ट्रेशन और फूड लाइसेंस के ऐसा कोई भी उद्योग चलाना पूरी तरह गैरकानूनी और गलत है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनका तबादला हो चुका है और आज जिले में नए खाद्य पदाधिकारी अपना योगदान (जॉइनिंग) ले सकते हैं.

दूसरी तरफ, कारखाने से जुड़े व्यवसायी ललित कुमार यादव ने स्वीकार किया कि सागर (मिल्क पाउडर) से मिठाई बनाई जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि व्यवसाय के रजिस्ट्रेशन के लिए उन्होंने आवेदन (अप्लाई) कर रखा है.

नए खाद्य पदाधिकारी से तत्काल छापेमारी की मांग

इलाके में धड़ल्ले से बिक रहे इस कथित नकली रसगुल्ले को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है. लोगों ने जिले के नए खाद्य पदाधिकारी और जिला प्रशासन से मांग की है कि सिसौनी स्थित कारखाने और सुपौल बाजार की संदिग्ध दुकानों पर तुरंत छापेमारी की जाए. मिठाइयों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाएं और दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

शंकर कुमार सहनी 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. लोकल टेलीविजन चैनल से लेकर राष्ट्रीय समाचार पत्रों तक में कार्य कर चुके शंकर राजनीति, अपराध और धर्म-संस्कृति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >