'सीमावर्ती गांव देश के पहले गांव हैं', पीएम मोदी ने माई भारत स्वयंसेवकों से किया संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'माई भारत' स्वयंसेवकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया. इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती गांवों के विकास, स्थानीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया. दरभंगा जिले के स्वयंसेवकों ने समाहरणालय स्थित एनआईसी केंद्र से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया.

Darbhanga News: दरभंगा में विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के माई भारत (MY Bharat) स्वयंसेवकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया. इस दौरान दरभंगा जिले के स्वयंसेवकों ने समाहरणालय स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया. प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती गांवों के विकास, स्थानीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया.

दरभंगा के स्वयंसेवक वर्चुअली हुए शामिल

कार्यक्रम में दरभंगा जिले के स्वयंसेवकों ने समाहरणालय स्थित एनआईसी केंद्र से हिस्सा लिया. इस मौके पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) स्वप्निल भी मौजूद रहे. कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों का भ्रमण कर लौटे स्वयंसेवकों के अनुभव जानना और उनके सुझावों को सुनना था.

पीएम मोदी बोले- सीमावर्ती गांव देश के पहले गांव

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवकों से सीमावर्ती क्षेत्रों के अनुभव, वहां की जीवनशैली, स्थानीय संस्कृति और विकास से जुड़ी चुनौतियों के बारे में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि "सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि देश के पहले गांव हैं." प्रधानमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों का समग्र विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है.

युवाओं की भूमिका और सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया जोर

प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने, स्थानीय परंपराओं के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि माई भारत मंच युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रहा है.

स्वयंसेवकों ने दोहराया विकसित भारत का संकल्प

कार्यक्रम के बाद दरभंगा के स्वयंसेवकों ने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने और सीमावर्ती व सुदूर क्षेत्रों के विकास में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया. स्वयंसेवकों ने कहा कि सीमावर्ती गांवों की यात्रा से उन्हें देश की विविध संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और वहां के लोगों के जीवन को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला.

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लेखक के बारे में

By राज कुमार रंजन

राज कुमार रंजन दो दशक से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम कर चुके रंजन प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों में गहरी पैठ रखते हैं.

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