ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के बीच होगा शैक्षणिक सहयोग

बिहार सरकार मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है.

Darbhanga News: मिथिला की समृद्ध संस्कृत परंपरा और दुर्लभ पांडुलिपियों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है. सरकार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग स्थापित करने के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा है.

उच्च शिक्षा निदेशक ने भेजा प्रस्ताव

उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल ने 22 जुलाई को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. दिवाकर आचार्य को पत्र भेजकर दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक साझेदारी स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की है.

पत्र में बताया गया है कि यह पहल राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के प्रयासों से आगे बढ़ी. उन्होंने ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के प्रस्ताव से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अवगत कराया था. बिहार सरकार ने इस पहल को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ज्ञान, संस्कृति और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है.

दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर जोर

सरकार ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि मिथिला संस्कृत शोध संस्थान में वैदिक साहित्य, न्याय, मीमांसा, वेदांत, व्याकरण, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित, साहित्य और धर्मशास्त्र सहित अनेक विषयों की दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियों का अमूल्य संग्रह सुरक्षित है. इनका वैज्ञानिक संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन समय की आवश्यकता है.

संयुक्त शोध, प्रकाशन और डिजिटल रिपॉजिटरी की योजना

प्रस्तावित सहयोग के तहत संस्कृत पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और संरक्षण, संयुक्त शोध एवं प्रकाशन, अप्रकाशित ग्रंथों के समालोचनात्मक संस्करण तैयार करना, शिक्षक एवं शोधार्थी आदान-प्रदान, शोध फेलोशिप, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और कार्यशालाओं का आयोजन तथा डिजिटल रिपॉजिटरी विकसित करने की योजना शामिल है.

एमओयू और संयुक्त संचालन समिति का भी प्रस्ताव

बिहार सरकार ने इस सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने तथा संयुक्त संचालन समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा है. सरकार का मानना है कि यह साझेदारी संस्कृत, मिथिला की बौद्धिक विरासत और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ उच्च शिक्षा एवं पांडुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आदर्श मॉडल बनेगी.


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By Pravin kumar chou

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