LNMU News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के संबद्ध कॉलेजों में सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और शिक्षाकर्मियों से काम लिये जाने के मामले में विश्वविद्यालय सख्त रुख अपना सकता है. विश्वविद्यालय ने एक अगस्त को सभी संबद्ध कॉलेजों को ई-मेल भेजकर प्रावधान के विपरीत कार्यरत सेवानिवृत्त प्राचार्य, प्राध्यापक एवं कर्मियों को हटाने और तीन दिनों के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी अधिकांश कॉलेजों ने विश्वविद्यालय को जानकारी उपलब्ध नहीं करायी है.
लगातार मिल रही थी शिकायत
बताया जाता है कि संबद्ध कॉलेजों में सेवानिवृत्त शिक्षाकर्मियों को काम पर रखे जाने और इससे जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल रही थीं. शिकायतों में प्रबंधन समिति की सहमति से कुछ सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी कॉलेज में बनाये रखने के आरोप थे.
मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलपति के निर्देश पर कॉलेज निरीक्षक प्रो. अरुण कुमार सिंह ने एक अगस्त को सभी संबद्ध कॉलेजों के आधिकारिक ई-मेल पर पत्र भेजा. इसमें सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं शिक्षाकर्मियों को हटाकर तीन दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा गया था.
39 संबद्ध कॉलेजों से मांगी गयी थी रिपोर्ट
दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले में विश्वविद्यालय से संबद्ध 39 कॉलेज संचालित हैं. इनमें बहेड़ा कॉलेज ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को सेवामुक्त कर कार्रवाई की रिपोर्ट विश्वविद्यालय को भेज दी है. वहीं अधिकांश कॉलेजों ने अब तक यह जानकारी नहीं दी है कि उनके यहां सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य या शिक्षाकर्मी कार्यरत हैं या नहीं.
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, कॉलेजों की ओर से आदेश के अनुपालन में बरती जा रही उदासीनता से अधिकारी नाराज हैं. ऐसे कॉलेजों के खाता संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने जैसे सख्त कदम पर विचार किया जा सकता है. कॉलेज निरीक्षक प्रो. अरुण कुमार सिंह ने मामले को लेकर कुलपति से मुलाकात भी की है.
शासी निकायों के पुनर्गठन की भी तैयारी
इधर, विश्वविद्यालय द्वारा संबद्ध कॉलेजों में एक वर्ष के लिए नामित किये गये विवि प्रतिनिधियों का कार्यकाल भी पूरा हो गया है. ऐसे में नये प्रतिनिधियों के नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. जिन कॉलेजों के शासी निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, वहां नये शासी निकाय के गठन की संभावना भी बन रही है.
