कबीरकुटी के महंथ छोटेलाल दास का निधन, श्रद्धालुओं में शोक की लहर

कुशेश्वरस्थान शिवगंगा घाट स्थित कबीरकुटी के महंथ छोटेलाल दास का निधन हो गया. बुधवार को संत परंपरा के अनुसार कबीरकुटी परिसर में ही उन्हें समाधि दी गई. उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है.

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी से संतोष पोद्दार की रिपोर्ट

Darbhanga News: कुशेश्वरस्थान शिवगंगा घाट स्थित कबीरकुटी के महंथ छोटेलाल दास के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके निधन की सूचना मिलते ही बाजार क्षेत्र सहित दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, शिष्य और शुभचिंतक कबीरकुटी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे.

बुधवार को संत परंपरा और वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनके पार्थिव शरीर को कबीरकुटी परिसर में समाधि दी गई.

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

महंथ छोटेलाल दास के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में अनुयायी, संत-महात्मा तथा क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

इस दौरान पूरे कबीरकुटी परिसर में शोक का माहौल बना रहा. श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

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तबीयत बिगड़ने के बाद डीएमसीएच में चल रहा था इलाज

जानकारी के अनुसार 21 जून की रात अचानक महंथ छोटेलाल दास की तबीयत बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया.

चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) रेफर कर दिया था, जहां मंगलवार की शाम उनका निधन हो गया.

कम उम्र से ही धर्म और साधना में थे समर्पित

शिष्यों के अनुसार महंथ छोटेलाल दास लगभग 15 वर्ष की आयु से ही कुशेश्वरस्थान शिवगंगा घाट स्थित कबीरकुटी में रहकर साधना, पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों में संलग्न थे.

उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक सेवा, धर्म प्रचार और समाज कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था.

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सादगी और सेवा भाव के लिए थे प्रसिद्ध

महंथ छोटेलाल दास अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली, मधुर व्यवहार और धार्मिक योगदान के लिए क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त थे.

श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने हमेशा समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने का कार्य किया और लोगों को धर्म तथा मानव सेवा के लिए प्रेरित किया.

क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति

उनके निधन से अनुयायियों और क्षेत्रवासियों ने एक ऐसे संत को खो दिया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया.

श्रद्धालुओं ने उनके निधन को क्षेत्र की अपूरणीय क्षति बताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

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संत परंपरा के अनुसार दी गई समाधि

बुधवार को लकड़ी के संदूक में पार्थिव शरीर रखकर कबीरकुटी परिसर में ही समाधि दी गई. समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही और पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई.

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लेखक के बारे में

Published by: Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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