Darbhanga : मधुश्रावणी का समापन कल, व्रतियों के ससुराल से आया भार

वविवाहिताओं का विशिष्ट लोक पर्व मधुश्रावणी के समापन के महज दो दिन शेष रह गए हैं.

मेहमानों से गुलजार हुआ आयोजक परिवार का घर-आंगन दरभंगा. नवविवाहिताओं का विशिष्ट लोक पर्व मधुश्रावणी के समापन के महज दो दिन शेष रह गए हैं. रविवार को तृतीया तिथि पर टेमी की रस्म अदायगी के साथ इसका समापन हो जाएगा. इसे लेकर व्रतियों के परिवार में उत्सवी वातावरण नजर आ रहा है. इस अवसर शरीक होने के लिए मेहमानों का पहुंचना शुरू हो गया है. मेहमानों से आयोजक परिवारों के घर-आंगन गुलजार हो रहे हैं. हंसी-ठिठोली से वातावरण खुशी के रंग में रंग गया है. उल्लेखनीय है कि मिथिला में नवविवाहिताएं शादी के पहले साल मधुश्रावणी पर्व के दौरान विधि-विधान से 12 दिनों तक भगवान शिव एवं भगवती गौरी के साथ विषहारा की पूजा-अर्चना करती हैं. इसके पश्चात इसका समापन करती हैं. इस पारंपरिक अनुष्ठान में व्रती समर्पित भाव से जुटी हैं. शुक्रवार को व्रतियों ने प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त हो कर कोहवर घर में पूजन के लिए पहुंची. महिला पंडित ने विधान पूर्वक पूजन कराया. फूल-बेलपत्र के साथ प्रसाद भोग लगाया. विशेष तौर पर दूध-लावा चढ़ाया. इसके बाद महिला पंडित ने कथा कही. इस दौरान पारंपरिक गीतों का गायन महिलाओं की टोली करती रही. पूजन में शामिल अन्य महिलाओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. पूजन संपन्न करने के बाद व्रतियां दोपहर बाद सखी-सहेलियों के साथ डाला लेकर फूल लोढ़ने निकली. नख-शिख शृंगार कर नयी नवेली दुल्हन नजर आ रही व्रतियों के साथ पूरी टोली ने पारंपरिक गीत गाती तरह-तरह के फूल-पत्तियां संग्रह किया. फिर निकट के देवस्थल पर डाला सजाया. माधवेश्वरस्थान के अलावा केएम टैंक, सैदनगर सहित अन्य मंदिर परिसर देर शाम तक गुलजार रहे. इधर, परंपरा के अनुसार व्रतियों के ससुराल से मधुश्रावणी का भार शुक्रवार से ही पहुंचने लगा. बता दें कि मधुश्रावणी पर व्रतियों के ससुराल से भार भेजा जाता है. क्षमता के अनुसार लोग अपनी बेटी के ससुराल के परिजनों के लिए कपड़े, पकवान, मिठाई, फल आदि भार में देते हैं.

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