Digital Land Registry: जिले में जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया 17 अगस्त से पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. पेन-पेपरलेस भूमि दस्तावेज निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को पारंपरिक तरीके से स्टांप पेपर पर डीड लिखवाने और भारी-भरकम कागजात लेकर निबंधन कार्यालय पहुंचने की जरूरत नहीं होगी. नई व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया में समय और भागदौड़ कम होने की उम्मीद है. हालांकि, ग्रामीण, बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल प्रक्रिया नई चुनौती भी बन सकती है.
कातिब के माध्यम से ऑनलाइन तैयार होगा जमीन का दस्तावेज
नई व्यवस्था में जमीन या मकान खरीदने वाले क्रेता और विक्रेता को सबसे पहले सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने वाले कातिब के पास जाना होगा. कातिब की मदद से जमीन का दस्तावेज ऑनलाइन तैयार किया जाएगा.
इसी प्रक्रिया के दौरान क्रेता और विक्रेता की अंगुलियों तथा आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग, ई-सिग्नेचर और अन्य जरूरी डिजिटल प्रक्रिया पूरी की जाएगी. दस्तावेज ऑनलाइन अपडेट होने के बाद निबंधन के लिए अपॉइंटमेंट लिया जाएगा.
निबंधन कार्यालय में कम होगी भागदौड़
ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निबंधन कार्यालय में निबंधन पदाधिकारी के समक्ष केवल इकरार की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. जरूरत पड़ने पर ई-केवाईसी भी कराया जाएगा.
इकरार के समय क्रेता और विक्रेता को आधार कार्ड के साथ एक अन्य पहचान पत्र भी लाना होगा. ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा के कारण घर बैठे निबंधन का समय निर्धारित किया जा सकेगा.
मोबाइल, व्हाट्सएप या ई-मेल पर मिलेगी डिजिटल डीड
निबंधन पूरा होने के बाद डिजिटल डीड पीडीएफ के रूप में मोबाइल, व्हाट्सएप या ई-मेल पर उपलब्ध करायी जाएगी. इससे कागजी दस्तावेज के खोने, फटने या खराब होने की आशंका कम होगी.
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था में तकनीकी समस्याएं भी चुनौती बन सकती हैं. ओटीपी, ई-सिग्नेचर, आधार मिलान, सर्वर स्लो होने और नेटवर्क की समस्या के कारण निबंधन प्रक्रिया में देरी हो सकती है.
डिजिटल डीड में गलती हुई तो बढ़ सकती है परेशानी
नई व्यवस्था में जमीन के दस्तावेज में डिजिटल तरीके से जानकारी दर्ज होगी. ऐसे में खाता, खेसरा, रकबा या चौहद्दी की गलत प्रविष्टि भविष्य में विवाद का कारण बन सकती है.
ग्रामीण और बुजुर्ग लोगों के लिए डिजिटल दस्तावेज की प्रक्रिया को समझना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ऐसे लोगों को सर्विस प्रोवाइडर और संबंधित कर्मचारियों की सहायता की जरूरत पड़ेगी.
अब दस्तावेज लेखक नहीं, सर्विस प्रोवाइडर होंगे कातिब
विभागीय निर्देश के अनुसार नई व्यवस्था में कातिब दस्तावेज लेखक के बजाय सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करेंगे. उन्हें इसके लिए निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाएगा.
एक लाख रुपये तक के दस्तावेज पर एक हजार रुपये, एक लाख से अधिक और पांच लाख रुपये तक के दस्तावेज पर 2500 रुपये तथा पांच लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के दस्तावेज पर पांच हजार रुपये पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है. अन्य प्रकार के दस्तावेज लेखन के लिए एक हजार रुपये पारिश्रमिक मिलेगा.
अधिकारियों और कातिबों को दिया गया प्रशिक्षण
विभाग के अनुसार जिले के अवर एवं अपर निबंधन पदाधिकारियों, कर्मचारियों, अनुज्ञप्तिधारी एवं प्रशिक्षु कातिबों, मुद्रांक विक्रेताओं तथा संबंधित अधिवक्ताओं को नई व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
सर्विस प्रोवाइडर दस्तावेज तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन और अपॉइंटमेंट लेने में भी लोगों की सहायता करेंगे.
जिला अवर भूमि निबंधन पदाधिकारी स्वीटी सुमन ने बताया कि 17 अगस्त से जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. नई प्रणाली लागू होने से पहले संबंधित पदाधिकारियों, कर्मचारियों, अनुज्ञप्तिधारी कातिबों सहित सिस्टम से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
