कुलदीप हत्याकांड का तीन माह बाद भी खुलासा नहीं

कुलदीप यादव हत्याकांड के तीन माह बीत गये, कमतौल थानाध्यक्ष बदल गये, लेकिन मामले का उद्भदेन नहीं हो सका.

गिरफ्तारी तो दूर, हत्या के कारण का भी नहीं पता लगा सकी पुलिस दरभंगा. कुलदीप यादव हत्याकांड के तीन माह बीत गये, कमतौल थानाध्यक्ष बदल गये, लेकिन मामले का उद्भदेन नहीं हो सका. घटना के तीन माह बाद भी पुलिस सिर्फ हवा में तीर चला रही है. स्थित देखकर लगता है मानो पुलिस ने घटना को ठंडे बस्ते में डाल दिया हो. हत्यारों की गिरफ्तारी की बात तो दूर पुलिस अभी तक घटना के कारण का भी पता नहीं लगा सकी है. घटना के बाद पुलिस का कहना था कि बदमाशों ने पंपसेट की चोरी के मकसद से कांड को अंजाम दिया है. हालांकि पंपसेट की चोरी नहीं हुई थी. इसे देखते हुए पुलिस की यह थ्योरी लोगों की समझ से बाहर है. हाल के दिनों में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस मुख्यालय लगातार दिशा- निर्देश जारी कर रहा है. जिले के वरीय अधिकारी संगीन मामले के उद्भेदन को लेकर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. डीआइजी डॉ स्वप्ना गौतम मेश्राम हत्या आदि संगीन मामले की पुलिस अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा कर रही है. इन सबके बावजूद इस हत्याकांड का अभी तक खुलासा नहीं हो सका. तीन माह के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. अब कमतौल थाना की पुलिसिंग पर सवाल उठा रहे हैं. पंपसेट की सुरक्षा के लिए पास में सो रहे थे कुलदीप यादव 22 दिसम्बर को पंपसेट की सुरक्षा के लिए बोरिंग पर सो रहे राढ़ी पूर्वी पंचायत के कुम्हरौली निवासी कुलदीप यादव की हत्या कर दी गयी थी. धारदार हथियार से हत्या के बाद अपराधियों ने उनके शव को पुआल की ढेर पर रखकर कंबल से ढक दिया था. अहले सुबह खून से सना उनका शव पुलिस ने बरामद किया था. सूचना पर सिटी एसपी के अलावा सदर एसडीपीओ टू व कमतौल थाना की पुलिस वहां पहुंची थी. फॉरेसिंक टीम को भी बुलाया गया था. एफएसएल, डॉग स्क्वायड व टेक्निकल टीम का भी सहयोग लिया गया था. घटना के दूसरे दिन मृतक के पुत्र सरोज कुमार के बयान पर अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. आवेदन में कहा गया था कि कुलदीप की किसी से दुश्मनी नहीं थी.

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Author: DIGVIJAY SINGH

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