Darbhanga News: दरभंगा के कमतौल क्षेत्र की प्रमुख जीवनदायिनी नदियों में शुमार खिरोई नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. जाले प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली इस नदी की वर्तमान स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि यह कभी धाराप्रवाह और अविरल बहा करती थी. नदी का पानी पूरी तरह ठहर चुका है और हर तरफ गंदगी का अंबार लगा है. चारों ओर जलकुंभी, कचरा और मलबे का साम्राज्य साफ देखा जा सकता है.
सिकुड़ता वजूद: किनारे झाड़ियों से घिरे, बीच में जमी जलकुंभी
नदी के दोनों किनारे आज ऊंची-ऊंची घास और कंटीली झाड़ियों से पटे पड़े हैं. नदी के बीच में जहां थोड़ा-बहुत पानी नजर भी आता है, वह पूरी तरह से हरे रंग की जलकुंभी से ढका हुआ है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि अनियंत्रित अतिक्रमण और कचरा डंपिंग के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो चुका है. अब यह नदी कम और एक बदबूदार नाला अधिक प्रतीत होती है.
पटवन और आजीविका का संकट, किसानों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, एक दौर था जब खिरोई नदी में सालों भर लबालब पानी बहता था.
खेती-किसानी पर चोट:इलाके के किसान इसी नदी के पानी से अपने खेतों की पटवन (सिंचाई) करते थे. लेकिन अब अत्यधिक गाद (सिल्ट) और जलकुंभी के कारण पानी का प्रवाह ठहर गया है, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. मछुआरा समाज बेहाल:स्थानीय स्तर पर मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले सैकड़ों परिवार इसी नदी पर निर्भर थे, जिनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. गर्मी में पैदल पार करने की नौबत: स्थिति इतनी विकट है कि गर्मी के दिनों में नदी कई जगहों पर पूरी तरह सूख जाती है और लोग इसे पैदल ही पार कर जाते हैं.
पर्यावरणविदों की चेतावनी: जलीय जीवों का जीवन खतरे में
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर फैली जलकुंभी के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. इसके अलावा, गाद और कचरे के कारण नदी की गहराई कम हो गई है, जिससे बरसात के दिनों में पानी का सही निकास नहीं हो पाता और पूरे इलाके में भयानक जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
प्रशासन और जल संसाधन विभाग से सफाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से खिरोई नदी को बचाने के लिए युद्धस्तर पर सफाई अभियान शुरू करने की गुहार लगाई है. लोगों की मांग है कि:
- नदी से जलकुंभी और गाद को पूरी तरह से हटाया जाए.
- नदी के तटों को अतिक्रमण मुक्त कराकर उनका सौंदर्यीकरण किया जाए.
- नदी में कचरा और प्लास्टिक फेंकने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खिरोई नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में यह ऐतिहासिक नदी पूरी तरह विलुप्त हो जाएगी.
