इकोलॉजिकल विज्ञान की समझबूझ के साथ कार्य करने पर मंत्री ने दिया जोर

मंत्री डॉ प्रेम कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को जैव विविधता प्रबंधन समिति के जिला स्तरीय प्रखंड व पंचायत स्तरीय सचिव, अध्यक्ष व सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया.

बहादुरपुर. जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्द्धन विषय पर पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ प्रेम कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को जैव विविधता प्रबंधन समिति के जिला स्तरीय प्रखंड व पंचायत स्तरीय सचिव, अध्यक्ष व सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इससे मिथिला वन प्रमंडल के सभागार के आलावा दरभंगा व मधुबनी जिला के जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्य जुड़े. इसमें मंत्री द्वारा जैव विविधता के विभिन्न अवयवों व व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी. उनके द्वारा जलवायु परिवर्तन, सुखाड़-बाढ़ सहित अन्य पर्यावरणीय समस्याओं की परिस्थितियों में स्थानीय देसी प्रणालियों के प्रयोग पर प्रकाश डाला गया. इसके अलावा उन्होंने वन विभाग के प्रशासन में अवस्थित वन, उसके बाहर के जंगल तथा अवकृष्ट भू-क्षेत्रों में वृक्ष, झाड़, जड़ी-बूटी व कंद-मूल की विविधता को संरक्षित करने एवं उनके प्राकृतिक स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता पर बड़े पैमाने पर इकोलॉजिकल विज्ञान की समझबूझ के साथ कार्य करने पर विशेष बल दिया. इन कार्यों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका व सहभागिता पर विशेष उल्लेख किया. आने वाले समय में जैव विविधता प्रबंधन समिति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रयास किये जाने की बात कही. इस अवसर पर पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव वंदना प्रेयषी, सचिव, प्रधान मुख्य सचिव वन संरक्षक एन. जवाहर, राज्य जैव विविधता पर्षद के अध्यक्ष भरत ज्योति के द्वारा भी विचार रखे गये. इसके अतिरिक्त विभिन्न जिलों के समिति सदस्यों के द्वारा विचार व सुझाव मंत्री के समक्ष रखा गया. दरभंगा जिला से एक समिति सदस्य के नाम प्रत्येक पंचायत में एक भूभाग वन विभाग को हस्तांतरित करने का सुझाव दिया गया, जिससे वन विभाग के द्वारा पार्क,औषधीय पौधशाला का निर्माण किया जा सके. वहीं मिथिला वन प्रमंडल पदाधिकारी भास्कर चंद्र भारती द्वारा प्रतिभागियों को जैव विविधता प्रबंधन समिति के महत्त्व के बारे में बताया गया. मौके पर विभिन्न जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्यों के अलावा अपर समाहर्ता नीरज कुमार दास, वन क्षेत्र पदाधिकारी अर्जुन प्रसाद गुप्ता, मिथिला वन प्रमंडल के अन्य वनकर्मी, वनरक्षी व वनपाल मौजूद थे.

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