मखाना प्रोडक्शन ट्रेनिंग: कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से काजी-बहेड़ा पंचायत के नगरडीह गांव में महिला किसानों के लिए मखाना में मूल्य संवर्धन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किया गया. इसमें महिलाओं को कच्चे मखाने की बिक्री के बजाय उससे तैयार उत्पाद बनाकर अधिक कमाई करने के तरीके बताए गए. प्रशिक्षण में रोस्टेड मखाना, मखाना पाउडर, लड्डू, स्नैक्स और मखाना खीर मिक्स बनाने का व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया.
कच्चे मखाने से तैयार उत्पाद तक
गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने महिला किसानों को बताया कि मखाने का प्रसंस्करण कर मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने से आमदनी बढ़ायी जा सकती है. उन्होंने कहा कि सिर्फ कच्चा मखाना बेचने के बजाय उससे अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार कर बाजार में उतारा जा सकता है.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया व्यवहारिक तरीके से समझायी गयी. इससे महिलाओं को घर या स्वयं सहायता समूह के स्तर पर मखाना आधारित कारोबार शुरू करने की जानकारी मिली.
खीर मिक्स समेत कई उत्पाद बनाने का प्रदर्शन
कार्यक्रम में रोस्टेड मखाना, मखाना पाउडर, मखाना लड्डू और मखाना स्नैक्स तैयार करने की विधि बतायी गयी. खास तौर पर मखाना खीर मिक्स तैयार करने का भी व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया.
महिला किसानों को यह भी बताया गया कि तैयार उत्पादों को बाजार के अनुरूप आकर्षक बनाने के लिए पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान देना जरूरी है. इसके साथ उत्पादों की बिक्री और बाजार तक पहुंच बनाने से जुड़ी जानकारी भी दी गयी.
मखाना से गांव में रोजगार की संभावना
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि दरभंगा मखाना उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है. ऐसे में मखाना का मूल्य संवर्धन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, मखाना आधारित उत्पाद तैयार करने से सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावना नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं. देश और विदेश में मखाने की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए भी बाजार की अच्छी संभावना है.
महिलाओं को दी गयी मखाना प्रसंस्करण की जानकारी
प्रशिक्षण में नगरडीह गांव की 24 महिलाओं ने भाग लिया. महिला किसानों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें मखाना से जुड़े नए काम सीखने का अवसर मिलता है.
प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण आयोजित करने की मांग की, ताकि वे मखाना प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री की तकनीक को और बेहतर तरीके से समझ सकें.
प्रतिभागियों को मिली लघु पुस्तिका
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के बीच मखाना प्रसंस्करण से संबंधित लघु पुस्तिका वितरित की गयी. इससे महिलाओं को प्रशिक्षण में बतायी गयी प्रक्रियाओं को बाद में भी समझने और दोहराने में मदद मिलेगी.
कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल मखाना उत्पादन को सिर्फ खेती तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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