Darbhanga News: दरभंगा. शहरवासियों में बंदरों के उत्पाद से राहत मिलने की उम्मीद जगी है. वन प्रमंडल से इसे लेकर निगम को अनापत्ति पत्र मिल गया है. बंदरों को पकड़ने के लिए अब नगर निगम एजेंसी का चुनाव करेगा. सामान्य बोर्ड की बैठक में 17 मई को पार्षद सह समिति अध्यक्ष नवीन सिन्हा ने सदन में यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के अंदर समिति अपनी जिम्मेवारी पूरी कर ली है. बंदरों को पकड़ने व स्थानांतरण आदि नियमों के उल्लेख के साथ वन प्रमंडल से अनुमति पत्र मिल गया है. बंदरों को पकड़ने के लिए अब निगम को एजेंसी तय करना है. बता दें कि पांच माह पूर्व 13 जनवरी को सामान्य बोर्ड की बैठक में इसके लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था. इस आलोक में नगर आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता ने तीन सदस्यीय पार्षदों की कमेटी गठित की थी. इसमें स्थायी समिति सदस्य नफीसूल हक रिंकू, पार्षद नवीन सिन्हा, मुकेश महासेठ को शामिल किया गया था.
बंदरों व आवारा कुत्तों से होने वाली समस्या समान
वन प्रमंडल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बंदरों को जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची से हटा दिया गया है. ऐसी स्थिति में बंदरों के कारण होने वाली समस्या को आवारा कुत्तों से होने वाली समस्या के समान माना जा सकता है. सार्वजनिक क्षेत्र में उपद्रव करने वाला बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से अनापत्ति पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है. कहा है कि कानूनी छूट के बावजूद बंदरों को पकड़ते समय केंद्र सरकार द्वारा जारी तरीकों का अनुपालन किया जाए, ताकि जीवित प्राणी पर किसी तरह की क्रूरता नहीं हो. पकड़ने के बाद ऐसी जगह छोड़ा जाय, जहां मानव आबादी कम या नगण्य हो. कहा है कि दीर्घकालिक व्यवस्था के लिए सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ व कचरा मुक्त बनाना आवश्यक है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
