Darbhanga News: अंचल मुख्यालय स्थित करीब 150 वर्ष पुराना ऐतिहासिक राजस्व हाट आज अपनी पहचान बचाने की चुनौती से जूझ रहा है. गांव-गांव में विकसित हो रहे नए बाजार, लगातार बढ़ते अतिक्रमण और सफाई व्यवस्था की अनदेखी के कारण इस हाट की रौनक फीकी पड़ गई है. सप्ताह में बुधवार और रविवार को लगने वाला यह हाट अब मुख्य रूप से सब्जी, फल, मसाले और मछली की बिक्री तक सीमित होकर रह गया है.
अतिक्रमण और गंदगी बनी बड़ी समस्या
जानकारी के अनुसार राजस्व हाट का कुल रकबा 4 एकड़ 42 डिसमिल है, लेकिन अतिक्रमण के कारण अब करीब तीन एकड़ भूमि ही उपयोग में रह गई है. हाट परिसर और उसके आसपास कचरे का अंबार लगा रहता है. नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैलती है और राहगीरों के साथ दुकानदारों को भी परेशानी होती है. कभी क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेलों के लिए प्रसिद्ध यह मैदान अब खेल प्रेमियों से भी सूना पड़ गया है.
कभी व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र था हाट
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार 19वीं शताब्दी के अंतिम दौर में स्थानीय जमींदारों ने लोगों की सुविधा के लिए इस हाट की शुरुआत कराई थी. उस समय यहां राशन, कपड़े, कृषि उपकरण, लकड़ी और मिट्टी के सामान के साथ बैल, गाय सहित अन्य मवेशियों की भी खरीद-बिक्री होती थी. व्यापारी बैलगाड़ी और घोड़ों से सामान लेकर आते थे तथा दूर-दराज के गांवों से लोग खरीदारी के लिए पहुंचते थे. कई दशक तक यह हाट क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा.
संरक्षण और व्यवस्थित व्यवस्था की उठी मांग
स्वतंत्रता के बाद यह भूमि राजस्व हाट के रूप में दर्ज हुई. बाद में यहां पंचायत भवन, किसान भवन, ट्राइसम भवन, सामुदायिक भवन और अन्य सरकारी भवन बने. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तत्काल अतिक्रमण हटाना संभव नहीं है तो प्रशासन व्यवसायियों से नियमानुसार किराया लेकर राजस्व वसूले. इससे सरकार को आय होगी और कई परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी. लोगों ने ऐतिहासिक हाट की गरिमा और स्वच्छता बहाल करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है.
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