असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और वर्तमान प्रणाली की जांच के लिए राज्यपाल सचिवालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सचिवालय द्वारा चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो भर्ती प्रणाली की समीक्षा कर सुधार के व्यावहारिक सुझाव देगी. यह निर्णय 24 अगस्त को “सभी पीएचडी धारक एवं शोधकर्ता संघ” के आंदोलनकारी छात्रों व राज्यपाल के बीच हुए समझौते के अनुपालन में लिया गया है. बिहार लोक भवन की ओर से 12 सितंबर को इसकी विधिवत अधिसूचना जारी कर दी गई है.
समिति में पूर्व आईएएस और विशेषज्ञ शामिल
गठित समिति में उच्च प्रशासनिक अनुभव और शिक्षा जगत से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किया गया है:
- समिति के सदस्य: सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमरजीत सिन्हा, सेवानिवृत्त आईएएस संजय कुमार, जाने-माने भौतिक विज्ञानी पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा तथा डॉ. पीके रॉय को सदस्य बनाया गया है.
- सदस्य-सचिव: राज्यपाल सचिवालय के अपर सचिव (विश्वविद्यालय) संजय कुमार (आईएएस) इस समिति के सदस्य-सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे.
विस्तृत जांच और सुझाव लेने का मिला अधिकार
छात्रों और राजभवन के बीच हुए समझौते के बिंदुओं को समिति के कार्यादेश का प्राथमिक आधार बनाया गया है. समिति को व्यापक शक्तियां प्रदान की गई हैं:
- दस्तावेजों की मांग: समिति विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों और वैधानिक निकायों से जरूरी आंकड़े व दस्तावेज मांग सकेगी.
- विशेषज्ञों से परामर्श: कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों और प्रशासकों के साथ बैठक कर लिखित सुझाव व अभ्यावेदन लिए जाएंगे.
- अतिरिक्त मुद्दे: समिति छात्रों की मूल मांगों के अलावा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी सुझाव दे सकेगी.
90 दिनों में लोक भवन को सौंपनी होगी रिपोर्ट
अधिसूचना के अनुसार समिति को 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने ठोस निष्कर्षों और क्रियान्वयन योग्य सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट बिहार लोक भवन को सौंपनी होगी.
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