Darbhanga News: घने कोहरे ने एक साथ निगल ली तीन जिंदगी, गम में डूब गया पूरा नेहरा गांव

Darbhanga News:घने कोहरे ने अनुमंडल क्षेत्र के सीमावर्ती प्रखंड मनीगाछी के नेहरा गांव के तीन युवकों की जिंदगी निगल ली.

Darbhanga News: सुबोध नारायण पाठक, मनीगाछी. घने कोहरे ने अनुमंडल क्षेत्र के सीमावर्ती प्रखंड मनीगाछी के नेहरा गांव के तीन युवकों की जिंदगी निगल ली. तीन घरों का सहारा छीन लिया. बच्चों को अनाथ बना दिया. इसने पूरे इलाके को मातम में डूबो दिया है. नेहरा निवासी छेदी सहनी के पुत्र सुजीत कुमार सहनी, पौआ सहनी के पुत्र अजय सहनी व राम नारायण यादव के पुत्र शंभु यादव तीनों जिगरी दोस्त थे. बुधवार की शाम तीनों मित्र एक ही कार पर सवार होकर बेनीपुर से घर जा रहे था, इसी दौरान नेहरा स्थित कोशी नहर के पश्चिमी किनारे सुजीत व अजय का मखानाफोड़ी चल रहा था. शंभु यादव स्वयं कार चला अपने दोनों मित्र को स्थल पर पहुंचाने जा रहे थे. उस सम रात के लगभग 11 बज रहे थे. घना कोहरा छाया हुआ था. कुछ भी साफ दिख नहीं रहा था. इसी बीच अचानक कार का संतुलन बिगड़ गया और कार गहरे पानी में चली गयी. रास्ता सुनसान होने के कारण इसकी जानकारी बगल में काम कर रहे उनके परिजन तक को नहीं लगी. तीनों कार सवारों ने उसी में दम तोड़ दिया. कुछ देर बाद परिजन ने ढूंढने निकाले, तो नदी में उपलाती कार दिखी. स्थानीय लोगों ने कार को बाहर निकाल पीछे का शीशा तोड़ तीनों को निकाला, लेकिन तबतक तीनों उसीमें दम तोड़ चुके थे. नेहरा के आपदा मित्र रंजीत सहनी व स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी तत्काल नेहरा पुलिस को दी. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. तीनों शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया. गुरुवार को एक साथ तीनों युवक का शव गांव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया.

दुनिया में आंख खोलने से पहले ही अनाथ हो गया सुजीत का गर्भस्थ शिशु

बेनीपुर/मनीगाछी. नहर में कार के गिरने से हुए भीषण हादसे ने दुनिया में आंख खोलने से पहले ही बच्चे को अनाथ बना दिया. मां के गर्भ में पल रहस सुजीत कुमार सहनी के आठ माह का संतान पिता के साये से महरूम हो गया. विदित हो कि नेहरा निवासी 27 वर्षीय सुजीत की सड़क दुर्घटना मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. सुजीत की शादी दो साल पहले ही चांदनी के साथ हुई थी. वह चार भाई में तीसरा था. सुजीत की मौत पर पत्नी चांदनी का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है. हर आने वालों से वह बस एक ही सवाल करती है कि अब पेट में पल रहे बच्चे का भरन-पोषण कौन करेगा. सुजीत गांव में ट्यूशन पढ़ाकर व मखान का कारोबार कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था. पत्नी को मलाल है कि पेट में पल रहा बच्चा अनाथ हो गया. पिता अपने बच्चे का मुंह तक नहीं देख पाया. हमलोगों को अनाथ कर क्यों चले गये.

एकसाथ पांच बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया

बेनीपुर. एक झटके में ही एक साथ पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया. विदित हो कि घने कोहरे के कारण बुधवार की रात कार दुर्घटना ने अजय कुमार सहनी व शंभु यादव की मौत हो गयी. इसमें पांच बच्चे अनाथ हो गये. अजय सहनी की विधवा रुबी देवी सहित उनका दुधमुंहा एक बेटा व दो बेटी तथा शंभु यादव के दो बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया. अजय व शंभु की पत्नी पर विपत्ति का पहाड़ सा टूट पड़ा है. अजित मखाना का कारोबार कर परिवार चला रहा था. उसकी मौत पर पत्नी की करुण क्रन्दन सुनकर प्रत्येक लोगों की आंखें नम हो जा रही थी. वही शंभु यादव लुल्हवा चौक स्थित नेहरा नर्सिंग होम का संचालक था. कार दुर्घटना में उसकी मौत पर पत्नी मनीषा देवी विलाप कर रही थी. वहीं पिता की मौत से बेफिक्र चहलकूद कर रहे दोनों अनाथ दूधमुंहे बच्चों को देख लोग भगवन को कोष रहे थे कि भगवान को ऐसा नहीं करना चाहिए. इन दुधमुंहें बच्चों का पालन अब कैसे होगा.

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Published by: Prabhat kumar

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