600 KG सोना दान करने वाली महारानी का शाही भोज: 1 लाख मेहमान, 5 लाख रसगुल्ले बने, चांदी के बर्तन में ब्राह्मण भोज

Darbhanga Raj Pariwar Bhoj: दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी की बारहवीं पर एक लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई. तीन हजार प्रकार के व्यंजन तैयार किए गए. इस महाभोज में राज्यपाल भी पहुंचे थे.

Darbhanga Raj Pariwar Bhoj: दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी की बारहवीं पर गुरुवार को ऐतिहासिक और भव्य महाभोज का आयोजन किया गया है. यह महाभोज अपनी भव्यता और परंपरा के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. आयोजन में करीब एक लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है. भोज में ब्राह्मणों को चांदी की थाली, ग्लास, कटोरी, चम्मच और बिस्किट दान में दिए जा रहे हैं.

भोज की तैयारी शाही अंदाज में की गई है. कहीं बाल्टियों में दही रखा गया है तो कहीं बड़े-बड़े टब में गुलाब जामुन भरे गए हैं. करीब पांच लाख मिठाइयां खास तौर पर इस आयोजन के लिए तैयार की गई हैं. 56 भोग, पारंपरिक मिथिला व्यंजन और 10 से 12 तरह की मिठाइयों से मेहमानों का स्वागत किया जा रहा है.

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी पहुंचे

इस महाभोज में देश के कई नामचीन राजघरानों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं. बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी आयोजन में पहुंचे. उनके साथ साधु-संत और धर्माचार्य भी मौजूद रहे. पूरा वातावरण परंपरा, श्रद्धा और सम्मान से भरा नजर आया.

तैयार किए जा रहे हैं तीन हजार प्रकार के व्यंजन

आयोजकों के अनुसार, इस भोज में करीब 3,000 प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं. भोजन पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी है. महारानी की पसंद का विशेष ध्यान रखा गया है. पांच तरह की साग, कचौड़ी, सब्जी, दाल, चावल और मिठाइयों की लंबी श्रृंखला मेहमानों को परोसी जा रही है.

भोज की व्यवस्था संभालने के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम लगाई गई है. बुधवार को श्राद्ध कर्म के अवसर पर भी 50 हजार लोगों को भोजन कराया गया था. गुरुवार को सुबह से ही लोगों का आना-जाना शुरू हो गया था.

मिथिला की परंपराओं के अनुसार की गई है व्यवस्था

आयोजन समिति के सदस्य प्रियांशु झा ने बताया कि ब्राह्मणों के लिए अलग से भोजन की व्यवस्था की गई है. मिथिला की परंपराओं के अनुसार हर व्यवस्था की गई है. हर व्यंजन में शुद्धता और मर्यादा का पूरा ध्यान रखा गया है.

भारत-चीन युद्ध में दान की थीं 600 किलो सोना

दरभंगा राज परिवार का इतिहास सिर्फ वैभव तक सीमित नहीं रहा है. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान दरभंगा राज ने देश के लिए बड़ा योगदान दिया था. उस समय 600 किलो सोना दान में दिया गया था. साथ ही तीन निजी विमान और 90 एकड़ का एयरपोर्ट भी देश को समर्पित कर दिया गया था. आज उसी जमीन पर दरभंगा एयरपोर्ट मौजूद है.

96 वर्ष की उम्र में ली थीं अंतिम सांस

अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन 12 जनवरी को हुआ था. वे 96 वर्ष की थीं और कुछ समय से बीमार चल रही थीं. युवराज कपिलेश्वर सिंह ने इसे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया. कड़ी सुरक्षा के बीच पारंपरिक विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया. मधेश्वरनाथ परिसर में राज परिवार के महाराजाओं और महारानियों का अंतिम संस्कार होता आया है. वहां नौ मंदिर बने हुए हैं. आज भी दरभंगा राज की परंपरा और विरासत उसी सम्मान के साथ जीवित है.

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Published by: Abhinandan Pandey

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