बिचौलियों से मुक्त होगा मिथिला का मखाना, आईएफपीआरआई की टीम ने मखाना के अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट पर दिया बड़ा भरोसा

Darbhanga News: अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के दक्षिण एशिया प्रमुख डॉ. अंजनी कुमार ने जाले कृषि विज्ञान केंद्र का किया दौरा. किसान धीरेन्द्र और अनिल कुमार के मखाना खेत व प्रोसेसिंग प्लांट का लिया जायजा. जानिए खबर विस्तार से…

Darbhanga News: मिथिलांचल के गौरव ‘मखाना’ और स्थानीय कृषि तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है. शनिवार को अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के दक्षिण एशिया प्रमुख डॉ. अंजनी कुमार एवं प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री डॉ. धीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया.

इस बेहद महत्वपूर्ण भ्रमण के दौरान अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने दरभंगा में मखाना उत्पादन, उसकी प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण) और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों का जमीनी स्तर पर जायजा लिया और बिहार के मखाने को वैश्विक बाजार (इंटरनेशनल मार्केट) से सीधे जोड़ने का बड़ा भरोसा दिया.

जाले के कृषि मॉडलों का बारीकी से निरीक्षण

कृषि विज्ञान केंद्र, जाले पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. दिव्यांशु शेखर ने किया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को केवीके परिसर में संचालित हो रहे विभिन्न उन्नत कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी प्रत्यक्षणों (डेमोस्ट्रेशन) की विस्तृत तकनीकी जानकारी दी. भ्रमण के दौरान वैश्विक टीम ने मुख्य रूप से इन उन्नत तकनीकों का बारीकी से अवलोकन किया:

  • मखाना उत्पादन की दोहरी तकनीक: परंपरागत ‘तालाब विधि’ के साथ-साथ पानी की बचत करने वाली आधुनिक ‘खेत विधि’ से मखाना की उन्नत खेती.
  • सिंघाड़े की नई किस्में: बाजार में भारी मांग वाले कांटारहित हरे एवं लाल सिंघाड़े की वैज्ञानिक खेती.
  • प्राकृतिक व एकीकृत कृषि: रासायनिक खाद मुक्त ‘प्राकृतिक खेती इकाई’, वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) यूनिट, हरी खाद के रूप में मूंग व ढैंचा का चक्र, और मेड़ पर मक्का उत्पादन का अनोखा मॉडल.
  • नीली और श्वेत क्रांति: एक साथ मछली एवं बत्तख पालन (एकीकृत मत्स्य पालन) तथा उद्यान पौधशाला (नर्सरी) और पॉलीहाउस में संरक्षित खेती.

मखाना खेत पहुंचे विशेषज्ञ

केवीके का अवलोकन करने के बाद आईएफपीआरआई (IFPRI) का यह उच्चस्तरीय दल जाले के मशहूर प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र कुमार के मखाना खेतों में सीधे जमीन पर उतरा. विशेषज्ञों ने जलभराव वाले खेतों में जाकर मखाना उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक और जमीनी समस्याओं को समझा.

इस दौरान मखाना की खेती में लगने वाली लागत, स्थानीय स्तर पर कुशल मजदूरों की कमी, मौसम चक्र में बदलाव के कारण फसलों को होने वाले नुकसान और जल प्रबंधन जैसी मुख्य चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई. डॉ. अंजनी कुमार ने आश्वस्त किया कि इन जमीनी इनपुट्स को वैश्विक स्तर पर नीतिगत (पॉलिसी मेकिंग) चर्चाओं में शामिल किया जाएगा ताकि भविष्य में किसानों को बेहतर सरकारी व संस्थागत सहयोग मिल सके.

अब सीधे विदेशों में एक्सपोर्ट होगा मिथिला का मखाना

दौरे के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने दरभंगा के एक अन्य सफल और प्रगतिशील किसान अनिल कुमार की अत्याधुनिक ‘मखाना प्रसंस्करण एवं बीज प्रसंस्करण इकाई’ (प्रोसेसिंग प्लांट) का दौरा किया. विशेषज्ञों ने वहां कच्चे मखाने (गुरी) की छंटाई, भुनाई, लावा फोड़ने (पॉपिंग) और ग्रेडिंग से लेकर पैकेजिंग की पूरी स्वचालित और अर्ध-स्वचालित व्यवस्था का सघन जायजा लिया.

निरीक्षण के बाद वैश्विक विशेषज्ञों ने मखाना के उत्पादन, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन), बेहतर ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय निर्यात (एक्सपोर्ट) की असीम संभावनाओं पर स्थानीय अधिकारियों संग गोलमेज चर्चा की. आईएफपीआरआई के दक्षिण एशिया प्रमुख ने चंपारण और मिथिला के किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि दरभंगा सहित पूरे बिहार के मखाना उत्पादक किसानों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बनाने, बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराने और मखाना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए संस्थान तकनीकी व नीतिगत स्तर पर हरसंभव वैश्विक सहयोग प्रदान करेगा.

इस ऐतिहासिक दौरे के समय कृषि विज्ञान केंद्र के कई वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मी, प्रगतिशील किसान और कृषि विभाग के स्थानीय पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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