Darbhanga News: उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (DMCH) के ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) रजिस्ट्रेशन काउंटर से सरकारी राशि में हेराफेरी और गरीब मरीजों के आर्थिक शोषण का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है. विभागीय और स्वास्थ्य विभाग के कड़े नियमों को ताक पर रखकर काउंटर कर्मियों द्वारा मरीजों से अवैध रूप से पांच-पांच रुपये वसूले जा रहे हैं. इस खेल की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मरीजों की पर्ची (रसीद) पर शुल्क की राशि ‘शून्य’ ($0$) अंकित की जा रही है, लेकिन नकद में पांच रुपये की अवैध वसूली धड़ल्ले से जारी है.
7 दिनों तक मान्य है एक पर्ची
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक और वैधानिक नियमों के तहत, ओपीडी में इलाज के लिए एक बार रजिस्ट्रेशन कराने के बाद वह पर्ची पूरे सात दिनों (एक सप्ताह) तक वैध मानी जाती है. इस अवधि के भीतर यदि कोई मरीज दोबारा या तिवारा किसी भी डॉक्टर से अनुवर्ती (फॉलो-अप) सलाह या जांच रिपोर्ट दिखाने आता है, तो उससे किसी भी प्रकार का दोबारा रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाना है.
बावजूद इसके, डीएमसीएच के रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर तैनात कर्मियों द्वारा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. दूर-दराज के गांवों से आने वाले सीधे-साधे और निरक्षर मरीजों को गुमराह कर उनसे दोबारा पांच-पांच रुपये ऐंठे जा रहे हैं.
रसीद पर ‘शून्य’ देखकर जब मरीजों ने पूछा सवाल, तो मिला टका सा जवाब
अस्पताल परिसर में मौजूद कई मरीजों और उनके परिजनों ने इस लूट के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्यक्त किया है. इलाज कराने आए पीड़ितों ने बताया कि जब वे अपनी पुरानी पर्ची लेकर काउंटर पर पहुंचे, तो कर्मियों ने उनसे दोबारा पांच रुपये की मांग की. जब सजग मरीजों ने हाथ में मिली नई कंप्यूटर पर्ची को देखा, तो उसपर फीस की जगह ‘शून्य’ ($0$) लिखा हुआ था.
इस विसंगति पर जब मरीजों ने काउंटर पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों से पूछताछ की और विरोध जताया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया. चूंकि मरीजों को डॉक्टर को दिखाना होता है, इसलिए वे मजबूरी में विवाद से बचने के लिए पैसे दे रहे हैं. रोज आने वाले हजारों मरीजों के हिसाब से यह अवैध वसूली प्रतिदिन हजारों और महीने में लाखों रुपये के सरकारी राजस्व के गबन की ओर इशारा कर रही है.
दोषियों पर होगी सख्त दंडात्मक कार्रवाई
इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले को लेकर जब ‘डीएमसीएच’ के उपाधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार से बात की गई, तो उन्होंने मामले को बेहद संवेदनशील माना. उपाधीक्षक ने कहा कि ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर सात दिनों के अंदर दोबारा पैसे लिए जाने और रसीद पर शून्य दिखाने की शिकायत उनके संज्ञान में आई है.
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जा रहे हैं. यदि आंतरिक जांच में किसी भी काउंटर कर्मी या ऑपरेटर द्वारा वित्तीय हेराफेरी, अवैध वसूली अथवा सरकारी राशि के गबन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी.
काउंटरों पर सीसीटीवी निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग तेज
इधर, दूर-दराज के जिलों (मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा) से डीएमसीएच आने वाले लाचार मरीजों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन से इस लूट-खसोट को तुरंत बंद कराने की गुहार लगाई है. सजग नागरिकों ने मांग की है कि:
- सीसीटीवी सर्विलांस: सभी ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर वॉयस रिकॉर्डिंग वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.
- जागरूकता बोर्ड: काउंटरों के ठीक ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में हिंदी में लिखा जाए कि “7 दिनों के भीतर दोबारा आने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.”
- औचक निरीक्षण: अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी हर दिन काउंटरों का औचक निरीक्षण करें ताकि काउंटर माफियाओं के चंगुल से गरीब मरीजों को बचाया जा सके और व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके.
दरभंगा से अजय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
