Darbhanga News: अवैध कोचिंग संस्थानों पर ढाई महीने बाद भी BEO की चुप्पी, नियमों को ताक पर रख चल रहे दर्जनों सेंटर

Darbhanga News: दरभंगा के बिरौल में बिना रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे कोचिंग संस्थानों पर ढाई महीने बाद भी बीईओ कुंदन कुमार ने कोई ठोस जांच नहीं की है. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बच्चों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ पर अभिभावकों में भारी आक्रोश है.

Darbhanga News: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के सरकारी दावों की पोल दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड में खुलती नजर आ रही है. बिरौल के सुपौल बाजार सहित आसपास के इलाकों में बिना किसी वैध पंजीकरण (Registration) और अनुमति के दर्जनों कोचिंग संस्थान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले का खुलासा हुए ढाई महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) द्वारा अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस जांच या कार्रवाई शुरू नहीं की गई है. शिक्षा विभाग की इस निष्क्रियता से अवैध संचालकों के हौसले बुलंद हैं.


इन प्रमुख इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं संस्थान

अखबार ‘प्रभात खबर’ में बीती 6 अप्रैल को इस संबंध में विस्तृत समाचार प्रकाशित कर विभाग का ध्यान आकर्षित किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, बिरौल प्रखंड के निम्नलिखित प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में नियमों की अनदेखी कर अवैध रूप से कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं:

  • बनदेवी नगर
  • कॉलेज रोड
  • सुपौल बाजार
  • शेखपुरा
  • डुमरी रोड
  • बलिया रोड
  • पुराना थाना रोड और इसके आसपास के अन्य क्षेत्र.

मानकों की अनदेखी: न पीने का पानी, न शौचालय; छोटे कमरों में बच्चों की भारी भीड़

इन अवैध कोचिंग संस्थानों में शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है. मुनाफे के चक्कर में बच्चों की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है:

  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: अधिकांश सेंटरों पर छात्र-छात्राओं के लिए शुद्ध पेयजल (पीने का पानी) और अलग शौचालय जैसी आवश्यक और अनिवार्य सुविधाएं तक नदारद हैं.
  • ओवरक्राउडिंग (अत्यधिक भीड़): बेहद छोटे-छोटे कमरों में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे तपिश के इस मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
  • अभिभावकों की मजबूरी: स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक विकल्पों की कमी के कारण वे भारी मन से और मजबूरी में अपने बच्चों को इन असुरक्षित और गैर-पंजीकृत संस्थानों में भेजने को विवश हैं.

एक नजर में समझें: बिरौल कोचिंग विवाद की वर्तमान स्थिति

मुख्य बिंदु / पैरामीटरवर्तमान स्थिति और विवरण
मुख्य समस्याबिना रजिस्ट्रेशन और मानकों के उल्लंघन के दर्जनों कोचिंग सेंटरों का संचालन.
मामला प्रकाश में आने की तिथि06 अप्रैल (लगभग ढाई महीने से अधिक का समय बीता).
संबंधित प्रशासनिक अधिकारीप्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), कुंदन कुमार.
अधिकारी का पुराना दावाजांच कर संचालकों के विरुद्ध डीईओ (DEO) को कार्रवाई के लिए लिखना.
जमीनी हकीकतढाई महीने बाद भी धरातल पर एक भी संस्थान की जांच शुरू नहीं हुई.

बीईओ कुंदन कुमार का आश्वासन बनाम जमीनी हकीकत

मामला जब पहली बार उजागर हुआ था, तब बिरौल के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) कुंदन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया था कि बिना निबंधन के चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों की सघन जांच की जाएगी और दोषी संचालकों के विरुद्ध जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को दंडात्मक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी.

हालांकि, ढाई महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. इस संबंध में जब दोबारा बीईओ से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक कोचिंग संस्थानों की जांच नहीं की जा सकी है. हालांकि, उन्होंने एक बार फिर से दोहराया कि जल्द ही जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.


भविष्य के साथ खिलवाड़: जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश

शिक्षा विभाग की इस सुस्त कार्यप्रणाली और उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में गहरा असंतोष है. पूर्व बीस सूत्री अध्यक्ष कैलाश चौधरी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही के कारण सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. अवैध कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई न होने से सरकार के नियमों का मजाक बन रहा है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अविलंब एक विशेष टीम गठित कर इन संस्थानों की जांच कराई जाए और बिना रजिस्ट्रेशन वाले सेंटरों को तत्काल सील किया जाए.

दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट

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लेखक के बारे में

By Aaruni Thakur

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