बहादुरपुर के खैरा में 19 साल बाद भी स्कूल को नहीं मिला भवन, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर 66 मासूम

बहादुरपुर के सरकारी स्कूल में भवन का अभाव, 66 बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर। मध्याह्न भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी है भारी संकट।

बहादुरपुर प्राथमिक विद्यालय: बिहार में सरकारी विद्यालयों की सूरत बदलने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के तमाम प्रशासनिक दावों के बीच बहादुरपुर प्रखंड के खैरा स्थित एनपीएस बहादुरपुर मुसहरी की बदहाली शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र में स्थित यह प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2007 में स्थापित हुआ था. लगभग दो दशक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस विद्यालय को आज तक अपना खुद का पक्का भवन नसीब नहीं हो सका है. नतीजतन यहां नामांकित 66 मासूम बच्चे खुले आसमान और पेड़ के नीचे बैठकर ककहरा सीखने को मजबूर हैं. वर्तमान में यह विद्यालय हरिजन दरवाजे के चबूतरे पर किसी तरह संचालित हो रहा है.

कक्षा एक से पांच तक के 66 बच्चे नामांकित

विद्यालय में कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था है. यहां कुल 66 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें 30 छात्र और 36 छात्राएं शामिल हैं.

  • शिक्षकों की तैनाती: बच्चों को शिक्षित करने के लिए विद्यालय में कुल तीन शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें एक महिला और दो पुरुष शिक्षक हैं.
  • नियमित उपस्थिति: शिक्षक और सभी बच्चे प्रतिदिन समय पर विद्यालय पहुंचते हैं, लेकिन चारदीवारी और छत का अभाव उनके उत्साह पर पानी फेर देता है.

धूप और बारिश में पेड़ के नीचे चलती हैं कक्षाएं

विद्यालय में एक भी कमरा उपलब्ध न होने के कारण शिक्षकों को मजबूरन पेड़ की छांव में कक्षाएं लगानी पड़ती हैं. भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और बरसात के मौसम में खुले में पढ़ाई करना बच्चों के लिए बेहद कष्टकारी साबित होता है. बारिश होते ही बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाती है.

विधालय के बरामदे पर बन रहा मध्याह्न भोजन

चापाकल तक नहीं, बरामदे में बनता है मध्याह्न भोजन

स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय और चिंताजनक है:

  • पानी की समस्या: विद्यालय परिसर में बच्चों और शिक्षकों के लिए पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है, यहां एक अदद चापाकल तक नहीं लगा है.
  • भोजन व्यवस्था: मध्याह्न भोजन (एमडीएम) पकाने के लिए अलग से कोई रसोई शेड नहीं है. जैसे-तैसे खुले बरामदे में ही भोजन पकाया जाता है.
  • शौचालय की बदहाली: शौचालय के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है, जिसकी समुचित साफ-सफाई न होने से बच्चे परेशान रहते हैं.

एचएम कक्ष में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र

संसाधनों की इस भारी कमी के बीच वार्ड संख्या नौ का आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रधानाध्यापक कक्ष में ही संचालित किया जा रहा है. सीमित स्थान में दो अलग-अलग शैक्षणिक इकाइयों के चलने से बच्चों और शिक्षकों दोनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.

विभाग को कई बार लिखा गया पत्र, कार्रवाई नदारद

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण और भूमि आवंटन के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को कई बार लिखित पत्राचार किया जा चुका है. इसके बावजूद अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है. वहीं, इस संबंध में जब बीईओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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By पुरुषोत्तम कुमार चौधरी

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