Darbhanga News: दरभंगा. मारवाड़ी कॉलेज तथा डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षा, मनोविज्ञान और मार्गदर्शन का बौद्ध दृष्टिकोण : प्राचीन ज्ञान एवं समकालीन पद्धतियों का समन्वय विषय पर प्रधानाचार्य डॉ विनोद बैठा की अध्यक्षता में ऑन एवं ऑफलाइन मोड में सेमिनार का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि दिव्या ठाकुर ने कहा कि बौद्ध शिक्षाएं सजगता, करुणा और आत्म-जागरूकता पर आधारित है. मानसिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए यह अत्यंत प्रभावी हो सकती है. कहा कि बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के चुनौतियों के दौर में बौद्ध दृष्टिकोण बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक जीवन को एकीकृत करने में सहायक सिद्ध हो सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती बौद्ध शिक्षा
मुख्य वक्ता सह थाइलैंड के महाचूलालोंगकोर्नराज विश्वविद्यालय के डॉ फ्राप्लाद सोरावित आफिपन्हो ने बौद्ध सिद्धांतों को मनोविज्ञान के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग सहित शील, समाधि एवं प्रज्ञा के प्रभावों को विश्लेषित किया. ध्यान, करुणा और नैतिकता पर आधारित बौद्ध अभ्यासों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्राकृत विभागाध्यक्ष प्रो. सुदीप कुमार जैन ने कहा कि गौतम बुद्ध ने अपनी साधना को एक ईमानदार अनुशंधाता के रूप में प्रस्तुत किया. प्रधानाचार्य डॉ विनोद बैठा ने कहा कि सङ्गोष्ठी की महता को रेखांकित किया.
पत्रिका के प्रवेशांक का किया गया लोकार्पण
सेमिनार के संयोजक डॉ विकास सिंह ने कहा कि बौद्ध शिक्षाएं शिक्षा और मानसिक कल्याण के प्रति सतर्क, करुणाशील और परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक एवं बौद्ध मंगलाचरण से हुआ. स्वागत वक्तव्य बर्सर डॉ अवधेश प्रसाद यादव, धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव डॉ मुकेश कुमार झा ने किया. मौके पर डॉ सिंह के संपादकत्व में प्रकाशित पत्रिका ””कुसीनारा”” के प्रवेशांक का लोकार्पण किया गया.तकनीकी सत्रों में किया गया शोध पत्रों का वाचन
समापन सत्र में केन्द्रीय जम्मू विश्वविद्यालय के तुलनात्मक धर्म और सभ्यता केंद्र की अध्यक्ष प्रो. निरंजना भंडारी ने बौद्ध मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान, पटना के सहायक निदेशक डॉ राघव नाथ झा ने बौद्ध दृष्टिकोण में ज्योतिष, खगोलशास्त्र एवं यात्रा का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया. तीन तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ कामाख्या नारायण तिवारी, डॉ विकास सिंह एवं श्रीलंका के बौद्ध एवं पालि विश्वविद्यालय के डॉ. कन्देगम दीपवंसालंकार ने की. संयोजन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के डॉ मनीष मेश्राम, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ सुधीर कुमार एवं थाइलैंड से भिक्खु दीपरतन ने किया. तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के दर्जनों लोगों ने शोध पत्र का वाचन किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
