Darbhanga News: बेनीपुर. उफरदाहा गांव में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को कथावाचक वृंदावन के स्वामी सियाराम शरणजी ने कृष्ण व सुदामा की मित्रता पर प्रकाश डाला. कहा कि गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं और गुरु में विश्वास ही सबसे बड़ी तपस्या है. गुरु से बढ़कर कोई भी नहीं है. उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण ज्ञान के स्रोत गुरु ही होते हैं. सक्षम व समर्थ गुरु का चयन करें. एक आचरणवाण गुरु ही हमारे जीवन के आदर्श हो सकते हैं. उन्होंने भगवान कृष्ण व सुदामा की मित्रता पर कहा कि मित्रता सच्ची हो तो जिंदगी संवर जाती है. मित्रता सच्ची हो तो भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जैसी हो. अपना जीवन संवारना हो तो सुदामा जैसे बनकर द्वारकाधीश के दरबार में जायें, आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी. जीवन में कभी भी मनुष्य को अपनी ईमानदारी और सच्चाई नहीं छोड़नी चाहिए. कथावाचक ने कहा कि जीवन में कभी भी अपने अहंकार को पनपने न दें, क्योंकि यह विनाश का कारण बनता है. अच्छे विचार, संस्कार, आचरण ही मानव का मुख्य धन है. भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के जीवन का उद्धार है. इस दौरान कलाकारों द्वारा अनेक भक्ति गीत का गायन किया गया. मौके पर आयोजक केवल कृष्ण राय, श्याम राय ने कथावाचक एवं कलाकारों को सम्मानित किया.
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