घर-आंगन से मिलती कथा की पृष्ठ भूमि: मनमोहन

घर-आंगन से मिलती कथा की पृष्ठ भूमि: मनमोहनकथा लेखन में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण का खास महत्वपुरस्कार से मिली लेखन की नई उर्जाफोटो. 28परिचय. पत्नी पुष्पा झा के साथ प्रो. मनमोहन झादरभंगा. साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिलने की घोषणा से प्रसन्नता हुई है, लेकिन खुशी से कहीं ज्यादा गौरवांन्वित महसूस रहा हूं. यह बात साहित्य अकादेमी पुरस्कार के […]

घर-आंगन से मिलती कथा की पृष्ठ भूमि: मनमोहनकथा लेखन में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण का खास महत्वपुरस्कार से मिली लेखन की नई उर्जाफोटो. 28परिचय. पत्नी पुष्पा झा के साथ प्रो. मनमोहन झादरभंगा. साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिलने की घोषणा से प्रसन्नता हुई है, लेकिन खुशी से कहीं ज्यादा गौरवांन्वित महसूस रहा हूं. यह बात साहित्य अकादेमी पुरस्कार के लिए चयनित कथाकार प्रो. मन मोहन झा ने कही. सीएम कॉलेज के शिक्षक क्वार्टर में पत्नी पुष्पा झा के साथ चाय की चुस्की लेते हुए इस खुशी को जी रहे श्री झा से इस संबंध में जब बात की गयी तो उन्होंने कहा कि गौरव का अनुभव इसलिए हो रहा है कि अपने परिवार का मैं चौथा सदस्य हूं जिसे यह पुरस्कार दिया गया है. पिता व भाई के साथ उनके बहनोई प्रो. शैलेंद्र मोहन झा को यह पुरस्कार मिल चुका है. उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार से उन्हें साहित्य लेखन के लिए नई उर्जा मिली है. मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत प्रो. झा ने कहा कि कथा वही सफल होता है जो पाठक के मनोविज्ञान का विश्लेषण कर लिखा जाये. इस नजरिये से उनके विषय का महत्वपूर्ण सहारा मिला. कथा लेखन का प्रेरणा स्रोत अपने अग्रज राजमोहन झा को बताते हुए कहा कि हम दोनों की लेखन शैली मिलती है. कथा लेखन के लिए कहीं दूर भटकने की जरूरत को बेकार बताते हुए कहा कि उन्हें तो अपने घर आंगन में ही क हानी का प्लॉट मिलता रहा है. उन्होंने पत्नी को कथा का सबसे बड़ा स्रोत बताते हुए नये लेखकों से निरंतर लेखन करने की अपील करते हुए कहा कि पाठकों के मनोभाव से जुड़कर अपनी रचना अगर करें तो निश्चिततौर पर पसंद की जायेगी. दो पुत्री के बाहर रहने की वजह से मिल रहे एकांत को लेखन में सहायोगी कहा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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