कत्थक नृत्य कला को सहेजे : कुलपतिवाद्ययंत्रों की अनुगूंज से गुंजायमान हुआ भवनफोटो- 25 व 26परिचय- नृत्य प्रस्तुत करती बच्ची एवं उपस्थित लोगदरभंगा . लनामिवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और कत्थक कला को सहेजने की जरुरत है. नृत्य की भाव भंगिमाओं का आकर्षण बरबस ही अपनी ओर खिंचता है. इस तरह के आयोजन से वातावरण सुखद बनता है. वे स्थानीय हराही पोखर स्थित बहुउद्देशीय भवन मेें आयोजित नृत्य व शास्त्रीय गायन वादन कार्यक्रम का उद्घाटन के बाद कही. नृत्यार्पण नुपूर कलाश्रम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह लनामिवि के कुलपति प्रो. कुशवाहा, कुलानुशासक डा. अजयनाथ झा, पंडित रमेश मल्लिक एवं एडीएन सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रुप से की. अतिथियों का स्वागत संस्था की ओर से बाल कलाकर ने पाग चादर देकर सम्मानित किया. इसके बाद शास्त्रीय गायन वादन एवं नृत्य कीएक से एक आकर्षक प्रस्तुतियां हुई. स्वर लहरी और वाद्य यंत्रों की गूंज से बहुउद्देशीय भवन देर शाम तक गूंजता रहा. कार्यक्रम में संस्था के निदेशक रुपेश कुमार गुप्ता, अनिता कुमारी, अध्यक्ष प्रवीण कुमार झा सहित कला प्रमी उपस्थित थे.
कत्थक नृत्य कला को सहेजे : कुलपति
कत्थक नृत्य कला को सहेजे : कुलपतिवाद्ययंत्रों की अनुगूंज से गुंजायमान हुआ भवनफोटो- 25 व 26परिचय- नृत्य प्रस्तुत करती बच्ची एवं उपस्थित लोगदरभंगा . लनामिवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और कत्थक कला को सहेजने की जरुरत है. नृत्य की भाव भंगिमाओं का आकर्षण बरबस ही अपनी ओर खिंचता है. […]
