नहीं मिल रहा काम, तो घर छोड़ चले गये परदेस
भेंड़-बकरियों से भी बदतर स्थिति में सफर कर रहे मजदूर
पानी के बिना यहां की चौपट हो गयी किसानी
दरभंगा : गहराये जलसंकट से आमजन के हलक तो सूख ही रहे हैं, मजदूर तबके के लोगों की पेट की आग भी यहां नहीं बुझ पा रही है. काम नहीं मिलने के कारण मजबूरन परदेस की राह पकड़ ली है. नित्य हजारों की संख्या में इस इलाके से लोग पलायन कर रहे हैं. लिहाजा दरभंगा जंक्शन भीड़ से पटा पड़ा है. आलम यह है कि पांव रखने तक की जगह नहीं मिल पा रही है. इन लोगों ने रोजी-रोटी के जुगाड़ में परदेस का रुख कर लिया है. अधिकांश यात्री पंजाब, हरियाणा जा रहे हैं.
वहां धान की रोपनी करेंगे. उससे जो आय होगी, घर भेजेंगे, ताकि यहां चूल्हा जल सके. इसे लेकर अमृतसर जानेवाली जननायक एक्सप्रेस ठसा-ठस भर कर जा रही है. उल्लेखनीय है कि पिछले साल सूखा पड़ने तथा इस वर्ष भी मानसून पूर्व वर्षा नहीं होने के कारण किसानी चौपट हो गयी है. नमी के अभाव में बिचड़ा भी नहीं गिराया जा सका है. फलत: रोपनी के भी आसार नहीं के ही बराबर हैं. इस वजह से यहां काम नहीं मिल रहा. घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो रहा है. इसलिए मजबूरन परदेस का रूख करना पड़ रहा है.
ट्रेन की धुलाई का भी नहीं करते इंतजार : भीड़ का आलम यह है कि अमृतसर से यहां ट्रेन के पहुंचते ही यात्री इसमें सवार हो जाते हैं. वाशिंग पिट पर इसकी सफाई-धुलाई तक का इंतजार नहीं करते. जगह पाने के लिए कुछ यात्री तो दरभंगा पहुंचने से पहले ही दूसरे स्टेशन पर सवार होकर यहां आते हैं. स्वभाविक रूप से साफ-सफाई भी सही तरीके से नहीं हो पाती है.
सहरसा को मिली स्पेशल ट्रेन, दरभंगा नजरअंदाज : समस्तीपुर रेल मंडल का सर्वोच्च दर्जा प्राप्त स्टेशन होने के बावजूद महकमा दरभंगा के यात्रियों की सुविधा के प्रति पूरी तरह से गैरसंजीदा है. यही कारण है कि पहले जहां दूसरी जगहों से यात्री यहां ट्रेन पकड़ने आते थे, वहीं आज यहां के यात्रियों को दूसरी जगह से यात्रा करनी पड़ रही है.
दरभंगा से डिमांड के बावजूद पंजाब के लिए स्पेशल ट्रेन नहीं दी गयी. इसकी जगह सहरसा से स्पेशल चलायी जा रही है. लिहाजा जंक्शन की आय का ग्राफ गिरता जा रहा है, लेकिन शायद विभाग के अधिकारियों को कोई फिक्र नहीं है.
