2020 तक हृदय रोग की राजधानी बन जायेगा देश

डीएमसी में दो दिवसीय कार्डिकोन शुरू सही समय पर बीमारी का हो इलाज, तो रोग से बच सकतेहैं अधिकतर मरीज लोग कम उम्र में हो रहे हृदयरोग के शिकार खराब खानपान और बिगड़ी लाइफस्टाइल बन रही कारण सही दिनचर्या व खान-पान से दूर रहता है हृदय रोग व पक्षाघात दरभंगा : अगर लोग खानपान पर […]

डीएमसी में दो दिवसीय कार्डिकोन शुरू

सही समय पर बीमारी का हो इलाज, तो रोग से बच सकतेहैं अधिकतर मरीज
लोग कम उम्र में हो रहे हृदयरोग के शिकार
खराब खानपान और बिगड़ी लाइफस्टाइल बन रही कारण
सही दिनचर्या व खान-पान से दूर रहता है हृदय रोग व पक्षाघात
दरभंगा : अगर लोग खानपान पर नियंत्रण नहीं करेंगे, तो साल 2020 तक डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत हृदय रोग के मामले में विश्व की राजधानी बन जाएगा. 2020 तक एक तिहाई मौत हृदय रोग के कारण होगी. अगर लक्षणों की पहचान कर सही समय पर इस बीमारी का इलाज शुरु कर दिया जाए, तो अधिकतर मरीजों की जान बचाई जा सकती है.
यह बातें डीएमसी ऑडिटोरियम में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित 26वें वार्षिक सम्मेलन में कोलकाता से आये डॉ मृणाल कांत दास ने कही. कहा कि युवा और बच्चे भी इस रोग की चंगुल में फंसते जा रहे हैं. यूरोपियन लोगों की अपेक्षा भारतीये कम उम्र में ही हृदय रोग से ग्रसित हो रहे हैं. यह रोग विश्व में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है. पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में यह अधिक भयावह परिणाम दे रहा है.
बताया कि कई रिसर्च में यह साफ हो गया है कि, यह रोग बड़ों से ज्यादा बच्चों और युवाओं को अपना शिकार बना रहा है. इसका कारण खराब खानपान और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल है. कार्यक्रम का उदघाटन डीएमसी प्राचार्य डॉ एचके झा, डॉ पीके भट्टाचार्य, डॉ मृणाल कांत दास, डॉ जीएन झा ने दीप जलाकर किया.
सबसे पहले करावें इसीजी: चिकित्सकों ने बताया कि इस प्रकार के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. दवा के रुप में स्प्रीन लिया जा सकता है. इसमें सबसे पहले ईसीजी किया जाता है.
ईसीजी दिल की सिर्फ उसी वक्त की स्थिति की जानकारी देता है, इसीलिए चलते हुए ईसीजी किया जाता है. जरुरत पड़ने पर ईको काडिर्योग्राम भी किया जाता है, जिसमें दिल के सही साइज, वॉल्व्स की खराबी और दिल की कैपेसिटी आदि के बारे में सही जानकारी मिल जाती है. सेहतमंद आदमी के दिल का पावर 60 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन माइनर हार्ट अटैक के बाद यह पावर 55 फीसदी और मेजर हार्ट अटैक के बाद यह सिर्फ 30 फीसदी रह जाती है.
साइंटिफिक सेशन में डॉ परासर, डॉ सुजित दास, डॉ एसके सिन्हा, डॉ विकास सिंह, डॉ पीके ओझा, डॉ एनके गुप्ता, डॉ पीके भट्टाचार्य, डॉ प्रवीर सिन्हा, एवं डीएमसीएच के डॉ जीएन झा, डॉ सीएम झा, डॉ आरके दास मौजूद थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >