पहल. भूमि अधिग्रहण के लिए रेलवे ने उपलब्ध कराये 365 करोड़ रुपये
मोतिहारी : सुगौली-हाजीपुर रेलखंड निर्माण में भूमि अधिग्रहण अधियाचना न मिलने के कारण कार्य बाधित है. जबकि भूमि अधिग्रहण के लिए रेलवे विभाग द्वारा 365 करोड़ रुपये जिला भूमि अर्जन विभाग को उपलब्ध करा दी गयी है.
पर्यटन की दृष्टि से फिलहाल हाजीपुर से केसरिया तक रेललाइन बिछाने की योजना प्रथम फेज में बतायी गयी है. इस कार्य के पूरा होने के बाद फिर भारत-नेपाल संधि स्थल के लिए चर्चित सुगौली तक रेललाइन बिछायी जायेगी. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे द्वारा राशि तो उपलब्ध करा दी गयी है लेकिन भू-अर्जन किये जानेवाली जमीन के संबंध में अब तक अधियाचना नहीं भेजी है. अधियाचना के तहत कहां पर कौन सी भूमि और कितनी भूमि चाहिए. इसका उल्लेख होता है. फिलहाल जो संभावित आंकड़े हैं वह करीब 67.60 डिसमिल भूमि का है. केसरिया से पहले मुजफ्फरपुर के साहेबगंज में भी जमीन अधिग्रहण शेष है. इस बीच हाजीपुर से सुगौली के बीच जगह-जगह मिट्टी कार्य व रेलवे प्लेटफार्म के बोर्ड भी लगे हैं. कुछ बोर्ड अदृश्य हो गये हैं.
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है रेलखंड: हाजीपुर-सुगौली रेलखंड पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. वैशालीगढ़, विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप, धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अरेराज धाम, लौरिया अशोक स्तंभ, खेती-किसानी के लिए चर्चित हरसिद्धि व संधि स्थल सुगौली को जोड़ती है उक्त रेलखंड. वैशाली व केसरिया में प्रतिदिन 500-2000 तक बौद्ध पर्यटक आज भी आते हैं. अगर रेलवे सुविधा मिलने लगे तो इनकी संख्या बढ़ सकती है.
छह जून 2003 को अटलजी ने किया था शिलान्यास : हाजीपुर-सुगौली रेलखंड का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह जून 2003 को किया था.
इस मौके पर हाजीपुर में तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार(अब बिहार के मुख्यमंत्री), तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी सहित कई दिग्गज नेता थे. उद्देश्य था बुद्धिस्ट रेल सर्किट से जोड़ने व पर्यटन को बढ़ावा देने का. उस समय 325 करोड़ का प्रोजेक्ट था.
