मोतिहारी : पौने तीन साल में बिहार में महागठबंधन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए अभी तक न जमीन अधिग्रहण करा सकी है न निर्माण कार्य शुरू करा सकी है. महागठबंधन के तीनों दलों के नेताओं को बयान व पुतला दहन के बजाये विश्वविद्यालय भवन निर्माण की दिशा में ताकत लगानी चाहिए ताकि छात्रों का भला हो. उक्त बातें भाजपा के महामंत्री डा लालबाबू प्रसाद, मार्तण्ड नारायण सिंह व मीडिया प्रभारी राजा ठाकुर ने बयान जारी कर दी है.
इनलोगों ने कहा है कि केविवि स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने स्पष्ट कहा था कि यदि किसी को केविवि प्रबंधन के प्रति रोष है तो उसका कारण है कि उनका पैरवी नहीं सुना जाना. यह रोष जायज नहीं है क्योंकि नामांकन प्रक्रिया पारदर्शी ढ़ंग से हुई. मंत्री जी ने यह भी कहा था कि जिन लोगों की पैरवी नहीं सुनी गयी वे लोग नाराजगी में समय-समय पर केविवि पर गरजते है. ध्यान रहे कि डायन भी एक घर बक्शती है. यह तो मां सरस्वती का मंदिर है, जहां चंपारण व देश का भविष्य निवास करता है. यह बयान छात्र-छात्राओं के हितों की रक्षा के लिए दिया गया है. इन नेताओं ने कहा है कि 26 मई 2014 को केंद्र सरकार बनी तो राधामोहन सिंह कृषि मंत्री बने और उसके ठीक एक दिन बाद प्रथम बैठक में केविवि के साथ महात्मा गांधी का नाम जुड़ा और राशि भी निर्गत हुई.
