वर्तमान टैक्स स्लैब में हो बढ़ोतरी

आम बजट. किसी को मजबूत अर्थव्यवस्था, तो किसी को चाहिए राहत रक्सौल : नोटबंदी के बाद सरकार की पहले आम बजट से सभी वर्गों के लोगों को सरकार से कुछ ना कुछ उम्मीद है. प्रभात खबर परिचर्चा में प्रभात खबर कार्यालय में उपस्थित लोगों ने सरकार से खासकर वित्त मंत्री से अपने-अपने हिसाब से मांग […]

आम बजट. किसी को मजबूत अर्थव्यवस्था, तो किसी को चाहिए राहत

रक्सौल : नोटबंदी के बाद सरकार की पहले आम बजट से सभी वर्गों के लोगों को सरकार से कुछ ना कुछ उम्मीद है. प्रभात खबर परिचर्चा में प्रभात खबर कार्यालय में उपस्थित लोगों ने सरकार से खासकर वित्त मंत्री से अपने-अपने हिसाब से मांग रखी. प्रोफेसर डॉ अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार को इस बार शिक्षा के लिए बजट को बढ़ाना चाहिए. देश में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की स्थिति काफी खराब है. ऐसे में इसके लिए बजट का 10 प्रतिशत इस क्षेत्र में खर्च किया जाना चाहिए. वेतनभोगियों को टैक्स में राहत देने के साथ-साथ पांच लाख के तक के आय वाले लोगों को टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए.
संत माइकल स्कूल के प्राचार्य एम सत्यजीत दास ने कहा कि टैक्स पेयर को राहत दी जानी चाहिए. नोटबंदी के असर से अस्त-व्यस्त अर्थव्यवस्था को राहत देने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की जानी चाहिए. आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाना चाहिए. युवा अभिषेक यादव ने कहा कि टैक्स के स्लैब को बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही पहली बार आम बजट के साथ रेल बजट में सरकार को रेल के स्लीपर व एसी क्लास के किराये में कमी करनी चाहिए. क्योंकिं सरकार बनने के बाद से बड़े पैमाने पर किराये में वृद्धि पहले ही किया जा चुका है.
युवा युवराज सर्राफ का कहना था कि नोटबंदी के बाद रूपयां निकालने की लिमिट को बढ़ाया जाना चाहिए. नोटबंदी के मार से परेशान प्रदेश में काम करने वाले मजदूर जो अपने गांव वापस आ चुके है, उनके लिए काम की व्यवस्था की जानी चाहिए.
युवा नीतेश कुमार का कहना था कि युपीए सरकार के दौरान डीजल-पेट्रॉल से सब्सीडी हटाया गया और तब तय हुआ था कि अंतराष्ट्रीय मूल्य के मुताबिक लोगों को पैसा खर्च करना पड़ेगा. अब जबकि अंतराष्ट्रीय मूल्य काफी गीर चुका है तो सरकार लोगों से काफी अधिक रुपया वसूल रही है. इसपर छूट मिली चाहिए.
युवा राजेश कुमार ने कहा कि बजट रोजगारपरक होना चाहिए. सरकार ने घोषणा की थी कि प्रतिवर्ष एक करोड़ युवाओ को रोजगार दिया जायेगा. लेकिन नोटबंदी से बड़ी संख्या में रोजगार में कमी आयी है. सरकार को इसको ध्यान में रखना चाहिए. इस साल पांच राज्यों में चुनाव है ऐसे में बजट चुनाव को नजर में नहीं रखकर बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को देखते हुए होना चाहिए.
वहीं विजय यादव का कहना था कि बजट आमजनो के हित को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए. जिससे गरीबों को राहत मिले, महंगाई में कमी आये. संतोष कुमार का कहना था कि इस बार आम बजट के साथ रेल बजट में रक्सौल के अंतराष्ट्रीय महत्व को देखते हुए एक सुपरफास्ट ट्रेन जरूर मिलनी चाहिए.

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