अनदेखी. एक दशक पहले केंद्र सरकार ने दी थी स्वीकृति
मोतिहारी एफएम की आवाज नहीं देती सुनाई
मोतिहारी : दूरदर्शन केंद्र मोतिहारी के अधीन नेपाल सीमा से सटे रक्सौल और जयनगर(मधुबनी) में हाई फ्रिक्वेंशी केंद्र की योजना भूमि के अभाव में लंबित है तो मोतिहारी कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित दूरदर्शन केंद्र के एफएम की क्षमता मात्र 100 किलोवाट है, जिसे 1000 वाट करने की योजना भी फाइलों में है. सरकारें बदली लेकिन दूरदर्शन केंद्र की क्षमता नहीं बदली.
विभाग के अनुसार 100 किलोवाट क्षमता होने के कारण पांच किमी क्षेत्र तक ही एफएम बज सकती है. लेकिन स्पष्ट सुनायी दो किमी ही देता है. रक्सौल में अभी 300 वाट का एफएम सह दूरदर्शन केंद्र है. वह आज भी भाड़े के माकन में चल रहा है, जिसका किराया बढ़ाने के लिए जिप अध्यक्ष प्रियंका जायसवाल ने सूचना प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखा है. केंद्र विस्तार कर 10 हजार वाट करने की स्वीकृति 90 के दशक में ही रक्सौल व जयनगर में मिली थी.
सीमा क्षेत्र में केंद्र विस्तार का
क्या था उद्देश्य
नेपाल सीमावर्त्ती रक्सौल और जयनगर में 10 हजार वाट यानी करीब 500 किमी तक कवरेज करने की
योजना इस केंद्र से सरकार की है. नेपाल व चाइना के दूरदर्शन सह एफएम टावर भारतीय क्षेत्र से ऊंचाई या पहाड़ पर लगे है, जो सीधे भारतीय क्षेत्र के गांवों तक पहुंचती है. विभाग का कहना है कि ऐसे में पूर्वी की सरकार ने दोनों जगह हाई फ्रिक्वेंशी का टावर लगाने की
स्वीकृति दी. ताकि चाइना व अन्य एफएम के आवाज
का सपरेश कर भारतीय एफएम को नेपाल के गांव-गलियों तक पहुंचाया जा सके. क्योंकि नेपाल से बेटी-रोटी का संबंध है और सीमा क्षेत्र की संस्कृति भारतीय संस्कृति से मिलती है. ऐसे में उच्च क्षमता का एफएम यहां चालू हो जाये तो नेपाल में चाइनाा व अन्य देश अपनी संस्कृति व प्रभाव को नहीं स्थापित कर पायेंगे. रक्सौल, जयनगर के अलावे मोतिहारी केंद्र की क्षमता भी 100 वाट से बढ़ाकर 1000 वाट करने की थी वह भी अधर में है.
