दिन प्रतिदिन मंदिर के प्रति लोगों में बढ़ रही है आस्था
रक्सौल : उत्तरवाहिनी सरिसवा नदी के तट पर शहर के आश्रम रोड में स्थित छठिया घाट मंदिर शहर के लोगों के आस्था का केंद्र है. चाहे छठ पूजा हो या दशहरा पूजा, चाहे कोई व्रत त्योहार मंदिर पर विधिवत पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और शहर के लोग इसमे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. छठिया घाट मंदिर के इतिहास के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1912 में इस मंदिर का निर्माण कार्य होना शुरू हुआ था. लेकिन उस समय अंग्रेज सरकार की पुलिस बार-बार आकर मंदिर के निर्माण कार्य में विघ्न डाल देती थी.
इसके बाद मतिजन नामक एक मुसलिम महिला जो कि उस समय घोड़े की सवारी करती थी और शहर में एक पहचान रखती थी. उसने धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठ कर अपने स्तर से मंदिर का निर्माण कार्य संपन्न कराया. मंदिर की नींव आश्रम रोड निवासी भवनाथ साह के द्वारा रखी गयी थी. मतीजन के प्रयास से 1914 में मंदिर बनकर तैयार हो गया है और उसी समय से लोगों की आस्था मंदिर से जुड़ गयी. वर्तमान में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष राजमंगल प्रसाद ने बताया कि जब मंदिर बना था तो यहां केवल शिव मंदिर था.
इसके बाद धीरे-धीरे समाज के सहयोग से राम-जानकी मंदिर, सातो मइयां मंदिर, ब्रह्म बाबा का स्थान बन गया है. मंदिर में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. वही भक्तों के लिए एक सत्संग भवन भी बनाया जा रहा है. पिछले पांच सालों से मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भव्य नवरात्रि उत्सव मनाया जा रहा है.
सैकड़ों कलश रखकर मां की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है. मंदिर के पुजारी गणेश झा ने बताया कि इस मंदिर से रक्सौल की पहचान है. रक्सौल के लोगों की आस्था मंदिर से जुड़ी है. मंदिर में आने वाले और श्रद्धा से सिर नवाने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. नवरात्र और छठ में भारी संख्या में लोग यहां दर्शन और पूजन के लिए आते हैं.
