मोतिहारी : देश-विदेश निर्यात में किसानों को लीची की गुणवत्ता अब आड़े नहीं आयेगी. रख-रखाव की नयी तकनीक को अपना किसान अपने लीची को 60 दिन तक सुरक्षित कर सकेंगे. इस दौरान लीची के आकार, रंग एवं गुणवत्ता में किसी तरह का हृास नहीं होगा.
लीची के गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाये रखने की इस तकनीकी का शोध भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर मुंबई के वैज्ञानिकों ने किया है. रिसर्च सेंटर के फूड टेक्नोलॉजी डिवीजन के वैज्ञानिकों की टीम को यह सफलता सात वर्षों के कड़ी मेहनत के बाद मिली है. इसकी जानकारी रिसर्च टीम के कैप्टेन डाॅ एस गौतम ने दी. वे मुजफ्फरपुर मसहरी लीची अनुसंधान केंद्र में बुधवार को आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.
चंपारण के प्रतिनिधि के तौर पर सेमिनार में भाग लेकर लौटे लीची उत्पादक संघ के जिलाध्यक्ष प्रगतिशील किसान ललन शुक्ला ने बताया कि वैज्ञानिकों ने रेडिएसन के द्वारा फूड एंड एलाइड प्रोडक्ट के परीक्षण पर भी सफलता पायी है. किसान दस से एक घंटे के वैज्ञानिक तकनीकी से उपचार कर लीची को दो माह तक सुरक्षित
रख सकेंगे.
कहा कि सरकारी स्तर पर किसानों को तकनीकी शिक्षा की ट्रेनिंग देने की निशुल्क व्यवस्था मुजफ्फरपुर में की गयी है. माइक्रो स्माल एंड मिडियम इंटर प्राइजेज डेवलप्मेंट इंस्टीट्यूट मुजफ्फरपुर किसानों को लीची की रख-रखाव एवं पैकेजिंग का प्रशिक्षण देगा. बताया कि इक्छुक किसान पंजीकरण कर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते है. संस्था द्वारा आठ जून को बार कोड एवं 13 व 14 जून को पैकेजिंग की तकनीकी ट्रेनिंग आयोजित की गयी है. किसान श्री शुक्ला ने बताया कि लीची का निर्यातक किसानों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण उपयोगी सिद्ध होगा.
भाभा रिसर्च सेंटर मुंबई ने किया शोध
सात साल प्रयास के बाद मिली सफलता
आकार, रंग व गुणवत्ता नहीं आयेगी कमी
वैज्ञानिक तकनीक सिखेंगे लीची किसान
मुजफ्फरपुर में प्रशिक्षण की व्यवस्था
ट्रेनिंग के लिए पंजीकरण कार्य शुरू
