पहल. गैस कार्ड की तर्ज पर चढ़ेगा आधार व खाता नंबर, सर्वे का कार्य शुरू
गैस कार्ड की तरह शहरी व ग्रामीण उपभोक्ताओं को राशन कार्ड के लिए अाधार व खाता नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है.
मोतिहारी : जनवितरण प्रणाली से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ताओं के राशन कार्ड व जविप्र से संबंधित अन्य कार्डों में बैंक खाता संख्या, आधार व राशन कार्ड नंबर संग्रह कर सूचीबद्ध करना है. इसका उद्देश्य प्रत्येक उपभोक्ता को इंटरनेट के माध्यम से बैंक से जोड़ना है, ताकि भविष्य में कोई लाभ मिले तो उपभोक्ता के सीधी खाते में जा सके.
इसको ले जिले के सभी एमओ को निर्देश दिया गया है कि नये सिरे से सर्वे कर उपभोक्ताओं का डाटाबेस तैयार करें. जिला आपूर्ति अधिकारी राज कुमार ने बताया कि इस कार्य में एमओ विभागीय इंस्पेक्टर के अलावे टोला सेवक और विकास मित्र को लगाया गया है. यानी गैस कार्ड की तरह राशन कार्ड पर चढ़ेगा खाता व आधार नंबर.
सर्वे के तहत करना है निम्न कार्य : सर्वे के तहत डोर-टू-डोर जाकर राशन व खाद्यान्न कार्ड में उल्लेखित नाम की जांच करनी है. अगर उल्लेखित नाम में से किसी का निधन हो गया हो, बेटी की शादी हो गयी हो तो उसका नाम हटा देना है. अगर लाभुक सही है, नाम छूट गया है, घर में कोई नयी बहू आयी है तो उसका नाम जोड़ा जा सकता है.
नाम जोड़ने के साथ खाता और आधार नंबर भी जोड़ना अनिवार्य है. इधर, सूत्रों की माने तो गैस अनुदान राशि की तरह ही भविष्य में केरोसिन व खाद्यान्न पर मिलने वाली अनुदान उपभोक्ता के खाते में जायेगी. वैसे अधिकारिक तौर पर कुछ कहने से अधिकारी परहेज कर रहे हैं. अभी तो सिर्फ सर्वे का आदेश है.
केरोसिन में कटौती : पूर्वी चंपारण जिले को पहले 31 लाख लीटर केरोसिन का आवंटन था, जो अब नये निर्देश व कटौती के तहत 30 लाख 75 हजार लीटर हो गया है. ग्रामीण उपभोक्ताओं को अब 1.75 लीटर केरोसिन ही मिलेगा.
