आंदोलन दबाने में व्यस्त है प्रहरी व सेना
मोतिहारी : नेपाल में मधेसी आंदोलन के बीच नशे का कारोबार बढ़ गया है. नेपाल सुरक्षा एजेंसियां कर्फ्यूग्रस्त इलाकों में तैनात हैं. प्रहरी एवं सेना के जवान भी आंदोलन दबाने में लगे हैं. नतीजा इसका फायदा उठाते हुए नशे के कारोबारी चरस व अन्य मादक पदार्थ की बड़ी खेप भारत भेजने में कामयाब हो रहे हैं. मधेसी आंदोलन के दौरान इंडो-नेपाल सीमा पर विभिन्न जगहों से मादक पदार्थ की बरामदगी खुद व खुद इसकी पुष्टि कर रही है.
सूचना है कि नशे के सौदागरों ने सीमा से सटे नेपाल स्थित ठिकानों पर मादक पदार्थ का भारी मात्रा में स्टॉक कर रखा गया है. जहां से खुली सीमा के रास्ते मादक पदार्थ का खेप भारतीय बाजारों तक पहुंच रही है. लिहाजा भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी एवं कस्टम की कार्रवाई से सौदागर सहमे हुए हैं. वरना चरस, गांजा एवं अफीम जैसे तमाम मादक पदार्थ का बड़ा खेप भारतीय बाजारों में पहुंचने में देर नहीं होती.
महानगर से जुड़ा हैं तार
शरहद पर सक्रिय नशे के कारोबारियों का तार भारत के महानगर से जुड़ा है. नेपाल की खुली सीमा से बार्डर पार कर पहुंच रही मादक पदार्थ दिल्ली, कोलकाता, मद्रास आदि राज्यों तक पहुंच रही है. तस्करी के लिए नशे के कारोबारी रेल एवं सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं.
हाथ लगते हैं महज कैरियर
कार्रवाई में महज कैरियर ही पकड़े जाते हैं, कारोबारी हाथ नहीं लगते. नतीजा सिंडीकेट को भले ही कार्रवाई से आर्थिक क्षति होती है, लेकिन सौदागरों के नहीं पकड़े जाने से फलफूल रहा नशे का कारोबार पर अंकुशा नहीं लगता.
सख्ती बरतने की जरूरत
नेपाल में मधेसी आंदोलन का फायदा उठा मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़े सौदागरों पर लगाम कसना जरूरी हो गया है. इसके लिए सीमा की चौकसी के साथ राजमार्गों एवं रेलवे यातायात पर भी निगेहबानी करनी होगी. सीमाई जिला के रेलवे स्टेशन से खुलनेवाली वाली लंबी दूरी की ट्रेन एवं एनएच-28 पर वाहनों की सघन जांच की व्यवस्था होनी चाहिए.
