मोतिहारी : खास महाल (सरकारी) जमीन अगर किराया व लीज पर लेकर भाड़ा देनेवालों की लीज समाप्त की जायेगी और नियमानुसार किरायेदार को नये सिरे से की जा सकती है
बंदोबस्ती (लीज). इसको लेकर अपर समाहर्त्ता अरशद अली के नेतृत्व में विभागीय संचिकाओं को खंगालने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है. साथ में है वरीय उपसमाहर्त्ता सह राजस्व प्रभारी सुधीर कुमार. जानकार बताते है कि मोतिहारी शहर की करीब 30 प्रतिशत जमीन खास महाल की है, जिसका निबंधन कार्य नहीं होता. बल्कि धंधेबाज स्टांप पर निजी स्तर पर खरीद-बिक्री करते है. बेलिसराय मोहल्ले में भी अधिकांश भूमि खास महाल की है.
विभागीय संचिका से बन रही है सूची: विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खास महाल व बेतिया राज की जमीन पर दुकान और घर बनाकर सैकड़ों लोग वर्षो से रह रहे है. इसमें कुछ ऐसे दुकानदार है जो अपने नाम लीज व किरायनामा बनवाकर दूसरे को किराया पर दे दिये है.
कुछ लोग ऐसे भी है जो एक ही परिवार के विभिन्न सदस्यों को रिश्तेदारों के नाम पर दुकान बनवाकर भाड़ा वसूल रहे है. विभागीय स्तर पर सूची बनने के बाद स्थलीय जांच कर लीज व किरायेनामा ऐसे लोगों का रद्द किया जायेगा और सरकार की नयी नीति के त हत संबंधित किरायेदार को लीज कर दी जायेगी. आंकड़ों पर गौर करें तो मीना बाजार में करीब 350 और रमना में करीब 125 दुकान व मकान बेतिया राज व खास महाल की जमीन पर है.
बिना अनुमति के बने दुकानों की होगी जांच: शहर के मीना बाजार व अन्य क्षेत्रों में खास महाल व बेतिया राज की जमीन पर बिचौलियों की मिली भगत से मरम्मत के नाम पर पक्का दुकान बनानेवालों को चिह्नित कर मरम्मत आदेश के कागजातों की जांच की जायेगी. नियमानुसार खास महाल की जमीन पर किरायेदार पक्का मकान नहीं बना सकते.
कलेक्ट्रेट स्थित दुकानों की बन रही सूची: कलेक्ट्रेट स्थित दुकानों की भी सूची बन रही है कि कितने दुकानदारों ने दुकान का नवीनीकरण कराया है. कितने लोग निर्धारित सीमांकन से अधिक भूमि पर दुकान चला रहे है तो कितने लोग भाड़ा पर दुकान देकर निजी राजस्व वसूल रहे है. किराया पर दुकान देने व सीमांकन से अधिक जगह वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जायेगी.
