पकड़ीदयाल : पुलिस द्वारा चिरैया थाना के संजय साह की गिरफ्तारी से बच्चा चोर गिरोह का खुलासा हुआ है. पुलिस अनुसंधान से जानकारी मिली कि गिरोह का मास्टरमाइंड रूना देवी है. वह थाने के सिसहनी पंचायत की रहनेवाली है व स्थानीय अस्पताल में आशा कर्मी के रूप में कार्यरत है. अनि मनोज सिंह के अनुसार गिरोह ज्यादातर महिलाएं है.
50 हजार में बिकते हैं बच्चे व महिलाएं
पकड़ीदयाल : पुलिस द्वारा चिरैया थाना के संजय साह की गिरफ्तारी से बच्चा चोर गिरोह का खुलासा हुआ है. पुलिस अनुसंधान से जानकारी मिली कि गिरोह का मास्टरमाइंड रूना देवी है. वह थाने के सिसहनी पंचायत की रहनेवाली है व स्थानीय अस्पताल में आशा कर्मी के रूप में कार्यरत है. अनि मनोज सिंह के अनुसार […]

इनका मुख्य धंधा छोटे बच्चों को चुराकर बेचना, लड़कियों को बहला-फुसलाकर शादी करवा देना है. पुलिस को आशंका है कि ये गिरोह अस्पताल में नवजात बच्चों की अदला-बदली में भी हाथ आजमाती रहती है. गिरोह में बच्चों (लड़का) की कीमत 50 हजार से 1.5 लाख रुपये है. लड़कियों एवं औरत शादी के लिए 30-50 हजार में बेची जाती है. नवजात लड़की-लड़के की अदला-बदली के लिए ये लोग 50 हजार रुपये लेते है. ग्राहक की माली हालत देखकर कीमतों में बदलाव भी होता है.
गिरोह में चकिया, गोविंदगंज, ढ़ाका, चिरैया व पताही थाने की महिलाएं शामिल है. पुलिस के अनुसार पताही थाने के शंभू सिंह के यहां से बरामद तीन वर्षीय नीरज की मां सोनी देवी ने कई खुलासे किये. पुलिस के अनुसार सोनी देवी को उसके घर गोविंदगंज थाने के नवादा से उसके नैहर बहादुरपुर के शांति देवी, राकेश पटेल व विरेंद्र महतो झूठ बोलकर पकड़ीदयाल लाये. पकड़ीदयाल में उसे नशा मिला हुआ पेप्सी पिलाया.
फिर उसके बेटे नीरज को लेकर फरार हो गया. सोनी देवी पकड़ीदयाल अस्पताल से आशा कर्मी रूना देवी के साथ उसके घर सिसहनी चली गयी. रूना की इच्छा थी की सोनी को अपने बेटे से शादी करा दें ताकि मामला दफा-दफा हो जायेगा. सोनी बच्चे का गम भुला देगी लेकिन हुआ इसके उल्टा.
रूना का बेटा सोनी देवी के पेट पर ऑपरेशन का निशान देखकर शादी से इनकार कर दिया. सोनी देवी पहले से फैमिली प्लानिंग का ऑपरेशन करा चुकी थी. तब सोनी देवी ने थाने आकर कांड संख्या 135/15 के तहत रूना व संजय साह पर प्राथमिकी दर्ज करायी. केश अनुसंधानकर्त्ता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह के सभी सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कई नये खुलासे होंगे.
पुलिस ने कोर्ट में बच्चा व शंभू सिंह को हाजिर किया. न्यायाधीश ने बरामद बच्चे को उसकी मां सोनी देवी को सुपुर्द कर दिया. शंभू सिंह ने कानून की मदद कर अच्छे शहरी का उदाहरण पेश किया है.
बतादें कि पुलिस के कहने पर दिल्ली में नीरज के साथ रह रहे शंभू सिंह पकड़ीदयाल थाने आये और यह स्वीकारा कि उसने 50 हजार रुपये में बच्चे को खरीदा था. उसने बच्चा ढ़ाका थाने के पकड़ीहारी के वीणा देवी के माध्यम से खरीदा था. इतना तो तय है कि पुलिस कार्रवाई से सोनी देवी को चार महीना के बाद उसका बेटा नीरज मिल गया.